पडरौना। काम की बजाय केवल बयानबाजी करके सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने की सरकारी कोशिश का नतीजा यह रहा कि सत्र का पहला ही दिन बरसात से ज्यादे जलभराव के चलते बर्बाद हो गया। यहां तक की मॉडल स्कूलों व बीआरसी परिसर तक में जल जमाव से कार्य प्रभावित हो गया। ग्रामीण क्षेत्र के अन्य स्कूलों की तो बात ही अलग है। जहां कहीं स्थिति ठीक भी तो वहां या तो अध्यापक ही नहीं पहुंचे या फिर बच्चे नहीं आए। कुल मिलाकर परिषदीय स्कूलों का पहला दिन ही बर्बाद हो गया।
जिले में 2379 प्राथमिक व 824 जूनियर हाईस्कूल हैं। जलनिकासी का बेहतर प्रबंध नहीं होने तथा स्कूलों का फील्ड नीचा होने की वजह से बरसात होते ही स्कूलों में अगल-बगल का भी गंदा पानी जमा हो जाता है। पिछले वर्ष बरसात के चलते 200 से अधिक विद्यालय पखवारे भर तक बंद रहे थे। तत्कालीन डीएम ने बरसात खत्म होते ही ग्राम पंचायतों के जरिए जल निकासी के लिए पक्की नाली बनवाने, स्कूल भवन की मरम्मत तथा जरूरत के अनुसार फील्ड में मिट्टी भरवाने का निर्देश दिया था। यह काम अक्टूबर से शुरू होना था। उद्देश्य यही था कि अगली बरसात में फिर जलभराव के चलते पढ़ाई प्रभावित न होने पाए, लेकिन ये सारे काम केवल सरकारी बयानबाजी तक सिमटे रहे। नतीजा यह है कि रविवार व सोमवार को हुई बरसात में जिले के अधिकांश स्कूल जलजमाव की चपेट में आ गए। जिला मुख्यालय के नजदीक स्थित मॉडल प्राथमिक विद्यालय सोहरौना में जलभराव के चलते कमरों तक पहुंचना मुश्किल है। नेबुआ नौरंगिया ब्लॉक के पकड़ियहवा के प्राथमिक व जूनियर विद्यालय में जलभराव है। रामकोला कस्बे में स्थित बीआरसी परिसर में पानी जमा होने के चलते विद्यालय बंद रहा। इसी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय धोधरही में भी पानी जमा है। हाटा कस्बे में स्थित मॉडल स्कूल का परिसर जलभराव से प्रभावित है।
बच्चे तो आए ही नहीं, अध्यापकों भी कम ही पहुंचे
कसया कार्यालय के अनुसार बीआरसी परिसर में सात बच्चे ही पहुंचे थे तो यहां के प्राथमिक विद्यालय में केवल 20 बच्चे आए थे। बीईओ धीरेंद्र कुमार त्रिपाठी का कहना है कि बरसात की वजह से पढ़ाई प्रभावित हुई।
जौरा बाजार व रहसू बाजार प्रतिनिधियों के अनुसार प्राथमिक विद्यालय रहसू सुमालीपट्टी में सुबह नौ बजे तक ताला बंद था। पूर्व माध्यमिक एवं प्राथमिक विद्यालय रहसू जनोबी पट्टी में सुबह साढ़े नौ बजे अध्यापक तो पहुंचे थे, लेकिन बच्चे नहीं आए थे। प्राथमिक विद्यालय शिवराज पट्टी व पूर्व माध्यमिक विद्यालय गोविंद टोला में अध्यापक बारिश में भीगते हुए पहुंचे थे। जौरा बाजार स्थित फाजिलनगर ब्लॉक के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय तथा यहां के प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय में भी ताला बंद था। बीईओ शिवकुमार मौर्य का कहना है कि अनुपस्थित अध्यापकों से जवाब तलब किया गया है। तमकुहीरोड प्रतिनिधि के अनुसार बरसात के चलते सेवरही क्षेत्र के राजपुर खास, तवकलटोला,जोगनी, बैजूपट्टी, पकड़ीहार, दौनहा, दुबौली, जंगलीपट्टी, पिपराघाट, पिरोजहा, ब्रह्मपुर आदि गांवों के परिषदीय स्कूलों सोमवार को पढ़ाई प्रभावित रही। कहीं अध्यापक नहीं पहुंचे तो कहीं बच्चे ही नदारद रहे। कई जगह स्कूल परिसर में जलभराव के चलते भी दिक्कत आई।
मॉडल स्कूल की बाउंड्रीवाल ध्वस्त
बरवापट्टी। दुदही ब्लॉक के ग्राम पंचायत अमवा खास के मॉडल प्राइमरी स्कूल पिपरही की बाउंड्री पहली बरसात में ही ढह गई। गांव के लोगों ने निर्माण में गुणवत्ता की कमी का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है।
ग्राम पंचायत अमवा खास के टोला पिपरही में प्राथमिक विद्यालय को मॉडल बनाने के लिए एक लाख 77 हजार रुपये खर्च हुए हैं। इस धन से विद्यालय की चारदिवारी तथा खड़ंजा निर्माण होना था। से बाउंड्रीवाल व खडंजा होना था। गांव के लोगों का आरोप है कि बाउंड्रीवाल के निर्माण में मानकों की अनदेखी के चलते दीवार कमजोर हो गई। नतीजतन रविवार की रात में हुई बारिश के चलते बाउंड्रीवाल का अधिकांश हिस्सा टूटकर गिर गया है। ग्रामीण प्रमोद शर्मा, छोटेलाल तिवारी, कमलेश, बंका जायसवाल, सुरेश कुशवाहा आदि का कहना है कि निर्माण में गड़बड़ी की शिकायत आनलाइन पोर्टल पर की गई थी। अफसरों ने जांच के बाद शिकायत को सही बताया लेकिन शासन को गलत रिपोर्ट भेजी गई। अब दीवार गिरने के बाद जिम्मेदारों को वास्तविक कारणों का जवाब देना चाहिए।