रहसू बाजार/पकवा इनार। विश्व शांति के संदेश के साथ 11 फरवरी से बोद्ध गया से निकला बौद्ध भिक्षुओं का 108 सदस्यीय दल बुद्ध गमन मार्ग से पद यात्रा कर शुक्रवार की देर शाम नदवा विशुनपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय पहुंचा। वहां रात्रि विश्राम कर शनिवार को कुशीनगर पहुंच गया। बोध गया से शुरू हुई यात्रा राजगीर, नालंदा, वैशाली होते हुए कुशीनगर के वीरभारी का टीला, फाजिलनगर के सठियाव, घोड़धाप होते हुए शुक्रवार की शाम नदवा विशुनपुर पहुंची थी।
महात्मा बुद्ध उत्तरापथ (बुद्ध गमन मार्ग) होते हुए कुशीनगर गए थे। प्राचीन काल में उत्तरापथ से भारत का चीन से अफगानिस्तान तक व्यापार होता था। इस मार्ग से गौतम बुद्ध ने अंतिम यात्रा की थी। महात्मा बुद्ध फाजिलनगर के बदुराव, उस्मानपुर, पुरैना, पावानगर आदि गांव होते हुए कुशीनगर पहुंचे थे। उनके अनुयायियों ने इस मार्ग का निर्माण कराया था। बौद्ध भिक्षु टीराटमरामोट ने बताया कि वे विश्व शांति के लिए महात्मा बुद्ध के धार्मिक स्थलों की पद यात्रा पर निकले हैं। बुद्ध जिस मार्ग से कुशीनगर गए थे, उसी मार्ग से जा रहे हैं। वहां से लुंबिनी, श्रावस्ती, सारनाथ वाराणसी के बाद बोध गया में यात्रा समाप्त होगी। इस टीम में नौ महिलाएं भी हैं। इस दौरान सोमसाक चिराग, चोकघाई वांगून, थानापुन भोरमा, खाम्मन वंचरोन, पिंगपीव, विप्पप्रोन, सोंगकला आदि मौजूद रहे।