कौशाम्बी में बेघरों के लिए गुजरा साल आशियाने के इंतजार में ही बीता। इस दौरान जहां नगर पंचायत सिराथू और अजुहा के एक हजार गरीब बनकर तैयार एक हजार आवासों के आवंटन की राह ताकते रहे। वहीं पूरे साल इंदिरा आवास के भी करीब 3 हजार लाभार्थी आवास के लिए भटकते रहे। यही हाल लोहिया गांव के लोहिया आवास के लाभार्थियों का भी रहा। कांशीराम शहरी आवास योजना के तहत नगर पंचायत सिराथू में 600 और अजुहा कस्बे में 400 आवासों का निर्माण हुआ। करीब सालभर से दोनों कस्बों में आवास बनकर तैयार हैं। पर इनका अब तक आवंटन नहीं हुआ। कई बार इन लोगों ने नगर पंचायत के अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारियों को शिकायतीपत्र भी दिया। लेकिन कुछ नहीं हुआ।
440 ग्रामसभा के बेघर, भूमिहीन गरीबों को वित्तीय वर्ष 2013-14 में 5674 इंदिरा आवास आवंटन का लक्ष्य रखा गया था। ब्लाकों के माध्यम से ग्रामसभाओं से गरीबों की सूची मंगाकर ग्राम्य विकास अभिकरण ने आवास आवंटन की प्रक्रिया शुरू की। पर, इनमें से सिर्फ 4077 गरीबों को इंदिरा आवास का आवंटन किया जा सका। आवंटन के बाद भी अब तक महज 2800 इंदिरा आवास ही जिले में बनाए जा सके हैं। 2874 आवासों का निर्माण अब तक नहीं कराया जा सका है। लाभार्थी आवास निर्माण की किश्त के लिए पूरे सालभर तक प्रधान, ग्राम विकास अधिकारी, बीडीओ, परियोजना निदेशक ग्राम्य विकास अभिकरण और बैंक शाखाओं का चक्कर लगाते रह गए।
इस वर्ष 27 गांवों को लोहिया आवास चयनित किया गया है। फरमान है कि इन गांवों के बेघर, भूमिहीन गरीबों को लोहिया आवास का आवंटन किया जाए, ताकि इनकी आवास की समस्या खत्म हो सके। जिले के इन 27 गांवों में ग्रामसभा की बैठक करके आवासहीन गरीबों को चिह्नित किया गया। कुल 2883 गरीब चिह्नित किए गए। चयनित व्यक्तियों के खाते में आवास निर्माण की पहली किश्त भी भेज दी गई। पर, दूसरी किश्त नहीं भेजे जाने से कमोवेश सभी गांवों में लोहिया आवास आधे-अधूरे पड़े हैं। इसे लेकर लाभार्थियों ने अफसरों से शिकायत भी की।
लोहिया आवास आवंटन में मनमानी का भी आरोप भी कमोवेश सभी चयनित गांव के ग्रामीणों ने लगाते रहे हैं। कलेक्ट्रेट, विकास भवन आकर गरीब अक्सर डीएम, सीडीओ को प्रार्थनापत्र देकर प्रधान, ग्राम विकास अधिकारी पर सुविधा शुल्क लेकर अपात्रों को आवास आवंटन की शिकायत की। अफसर, सत्यापन कराकर अपात्रों को आवंटित आवास रद्द करने और गरीबों को योजना का लाभ दिलाने का आश्वासन देते रहे। पर, किसी भी गांव में सत्यापन और अपात्रों को दिए गए आवासों का आवंटन रद्द करने की कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे बेघर गरीब बेघर ही बने हुए हैं।