। पहाड़ों पर हो रही बारिश से यमुना में फिर से उफान आने लगा है। जिसके चलते तराई के बाशिंदों की चिंता बढ़ गई है। फिर से बाढ़ आने की चिंता में वह सहमे हैं। अगस्त के शुरुआत और अंतिम सप्ताह में दो बार यमुना नदी का जलस्तर बढ़ चुका है। जलस्तर बढ़ने से चायल के तराई क्षेत्र के मल्हीपुर, पिपरहटा, कटैया, डिहवा,बेनपुर, चकपिनहा, उमरवल, मोहम्मदाबाद आदि गांवों के सैकड़ों किसानों की पांच सौ बीघा दलहन, तिलहन और सब्जियों की फसलें नष्ट हो चुकी हैं।
अब तीसरी बार यमुना नदी में उफान आने लगा है। यह देखकर पिपरहटा गांव के सोहन फौजी, रमेश, धनराज, प्रवेश कुमार और मल्हीपुर के हीरालाल, हरिश्चंद्र, मनीष कुमार आदि ने बताया कि यमुना के जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है। बैराजों से जो पानी यमुना में छोड़ा गया है, अब उसका असर दिखाई पड़ने लगा है। ग्रामीणों को अब वर्ष 1978 में आई बाढ़ का मंजर भी याद आने लगा है।
जरूरी सामग्री जुटाने लगे लोग
लगातार बढ़ रहे यमुना के जलस्तर से मंझनपुर तहसील के बड़हरी गांव का संपर्क मार्ग 47 दिनों में चौथी बार टूट गया है। लगातार बढ़ रहे पानी से ग्रामीण दहशत में हैं। आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में नदी खतरे के निशान को पार कर सकती है। वहीं, लोग जरूरी सामग्री जुटाने में लग गए हैं।
सिंचाई विभाग के एक्सईएन जगदीश लाल ने बताया कि पहाड़ी इलाकों और पंजाब में हो रही बारिश के चलते यमुना का जलस्तर बढ़ा है। सोमवार को हथिनी कुंड बैराज से 2,38,751 क्यूसेक, दिल्ली के ओखला बैराज से 1,10,000 क्यूसेक और मथुरा के गोकुल बैराज से पानी छोड़ा गया है। इसका असर कौशाम्बी में भी दिखने लगा है।
शनिवार सुबह भन्नई नदी के रास्ते बड़हरी गांव को जोड़ने वाली सड़क जलमग्न हो गई जिससे ग्रामीणों की आवाजाही प्रभावित हो गई। गांव के रामबहादुर तिवारी, भइयालाल और रामआसरे ने बताया कि जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। लोगों ने एहतियातन मोमबत्तियां, सब्जी, खाद्य सामग्री और पशुओं के लिए चारा जुटाना शुरू कर दिया है।
एसडीएम सदर एसपी वर्मा ने बताया कि लेखपालों को अलर्ट पर रखा गया है। जिन गांवों में नाव की आवश्यकता होगी, वहां तुरंत उपलब्ध कराई जाएगी। हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।