पिता ने जिस इकलौती बेटी के हाथ पीले करने के सपने संजोए थे, उसके जिंदा रहते ही उसका श्राद्ध कर दिया। यह काम पत्नी की मौत के 13वें दिन किया। तिरस्कार की इस कहानी में गुस्सा और दुख दोनों है।
संदीपनघाट थाना क्षेत्र निवासी व्यक्ति की 42 वर्षीय पत्नी की 15 अक्तूबर को मौत हो गई थी। कारण यह था कि बेटी स्कूल जाने के बाद देर तक घर नहीं लौटी और उसका मोबाइल फोन बंद था। घर वालों ने उसकी शादी तय कर रखी थी। इसी सदमे में महिला ने फंदा लगाकर जान दे दी थी।
पीड़ित व्यक्ति के मुताबिक, उनकी 18 वर्षीय इकलौती बेटी क्षेत्र के एक इंटर कॉलेज में कक्षा 12 की छात्रा है। करीब एक महीने पहले उसकी फतेहपुर जिले में सगाई हुई थी। शादी की तारीख 25 नवंबर तय थी। परिवार में बेटी की शादी को लेकर खुशियों का माहौल बनने वाला था, लेकिन इससे पहले ही पत्नी की मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।
दूसरे दिन पुलिस ने बेटी को किया था बरामद
घटना के दूसरे ही दिन पुलिस ने घर से निकली बेटी को बरामद कर लिया था। उसे वन स्टॉप सेंटर में रखा गया। पत्नी की मौत के 13वें दिन बुधवार को पीड़ित व्यक्ति ने पत्नी के साथ बेटी का भी श्राद्ध किया और 13 पंडितों को भोज कराया।