क्षेत्र में हुई भैंस चोरी की घटना का पुलिस ने मंगलवार रात खुलासा कर दिया। कार्रवाई के दौरान पुलिस मुठभेड़ में दो आरोपी गोली लगने से घायल हो गए जबकि उनके पांच अन्य साथियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी की दोनों भैंसें, तमंचे, कारतूस और घटना में प्रयुक्त वाहन बरामद किए हैं।
जानकारी के अनुसार, शमशाबाद निवासी महेश प्रसाद यादव ने थाना मंझनपुर में तहरीर देकर बताया कि 11 जनवरी की देर रात अज्ञात चोर उनकी दो भैंस चोरी कर ले गए थे। इस पर थाना मंझनपुर में संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई थी। घटना के खुलासे के लिए पुलिस टीमों का गठन कर लगातार दबिश दी जा रही थी।
मुखबिर से सूचना मिली कि भैंस चोरी में शामिल आरोपी कोर्रो रोड से गुजरने वाले हैं। पुलिस टीम ने मौके पर घेराबंदी कर एक बाइक और दो पिकअप वाहनों को रोकने का प्रयास किया। खुद को घिरा देख आरोपियों ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में मो. सकील निवासी मंसूर नगर कस्बा मंझनपुर और हबीब उल्ला निवासी नया नगर कस्बा मंझनपुर घायल हो गए जबकि पांच अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
अन्य आरोपियों में सुरजीत, बड़कू निवासी गण बारा तफरी मंझनपुर, अंसार अहमद निवासी प्रेम नगर थाना सुल्तानपुर घोष जनपद फतेहपुर, नायाब आलम और मो. सादान अंसारी निवासी बेगम पुरवा थाना बाबू पुरवा जनपद कानपुर नगर शामिल हैं। पुलिस ने मौके से दो तमंचे, चार खोखा कारतूस, दो जिंदा कारतूस, एक पल्सर बाइक, दो पिकअप वाहन और चोरी की दोनों भैंसें बरामद की हैं।
भैंस चोरी की घटना को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई की गई। जनपद में चोरी व संगठित अपराध में लिप्त अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। मामले में आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।
- राजेश कुमार, पुलिस अधीक्षक
कानपुर से संचालित गिरोह करता था लोकल नेटवर्क का इस्तेमाल
मंझनपुर (कौशाम्बी)। भैंस चोरी के मामले में गिरफ्तार किए गए पशु चोरों से पूछताछ में उनके काम करने का तरीका सामने आया है। पुलिस के अनुसार, नायाब आलम और मो. सादान निवासी बेगम पुरवा, थाना बाबू पुरवा, कानपुर नगर इस गिरोह के मुख्य सरगना हैं जो कौशाम्बी सहित आसपास के जिलों में पशु चोरी की घटनाओं को अंजाम देते थे। गिरोह पहले स्थानीय स्तर पर लोगों से संपर्क कर ऐसे किसानों की जानकारी जुटाता था जिनकी दुधारू भैंसें सड़क किनारे बंधी होती थीं और जहां वाहन आसानी से पहुंच सके। इसके बाद गिरोह के सदस्य रात में घर की रेकी करते थे कि किसान बाहर सो रहा है या घर के अंदर। योजना के अनुसार दो लोग निगरानी करते थे जबकि दो सदस्य भैंस खोलने का काम करते थे। भैंस खोलने के बाद डीसीएम वाहन मौके पर बुलाया जाता था जिसमें पशुओं को लादकर कानपुर ले जाया जाता था। दुधारू भैंसों को वहां अच्छे दामों पर बेच दिया जाता था जबकि अन्य भैंसों को अलग-अलग स्थानों पर खपाया जाता था। पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार ने बताया कि गिरोह के सदस्यों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जा रही है और पशु चोरी के इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है। संवाद