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Kaushambi News: विकास का पहिया रुका...मनरेगा के अटके 15 करोड़, नए काम भी ठप

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मनरेगा योजना के तहत जिले की 451 ग्राम पंचायतों में किए गए विकास कार्यों का तकरीबन 15 करोड़ रुपये पांच माह से फंसा है। इसका कारण शासन का बजट रिलीज नहीं करना बताया जा रहा है। सामान आपूर्ति करने वाली फर्में भुगतान के लिए ग्राम प्रधानों पर दबाव बना रही हैं। वहीं, पंचायतों में विकास के पहिये की गति थम गई है। जबकि नए कार्य भी ठप हो गए हैं।
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आखिरी बार अक्तूबर 2024 में सामग्री का भुगतान किया गया था। सामग्री भुगतान के लिए फर्म संचालक पिछले पांच माह से उम्मीद लगाए बैठे हैं। इसके लिए वह ग्राम प्रधानों पर दबाव बना रहे हैं। साथ ही अब नए कार्यों के लिए सामग्री देने से भी कतरा रहे हैं। उधर, भुगतान के अभाव में 180 गांवों में काम पूरी तरह से ठप पड़ गया है। जहां चल भी रहा है, उनमें से अधिकतर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभार्थी स्वयं मजदूरी कर रहे हैं।



ग्राम पंचायत में साढ़े तीन लाख रुपये का काम करवाया गया है। भुगतान नहीं होने से अब सप्लायर ने उधार देने से मना कर दिया। लिहाजा कुछ काम अधूरा छोड़ दिया गया। शीतला प्रसाद मौर्य, ग्राम प्रधान पिपरकुंडी
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गांव में मनरेगा के तहत उधार लेकर करीब छह लाख रुपये से विकास काम कराया गया है। अभी गांव में काफी काम होना है। आपूर्ति कर्ताओं ने अब उधार देने से मना कर दिया है। इसलिए आगे काम रोक दिया गया है।

इंद्राज सरोज, ग्राम प्रधान, गुवारा तैयबपुर

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आधा दर्जन गांवों पर करीब 15 लाख रुपये छह महीने से बकाया है। भुगतान की कोई समय-सीमा नहीं होने के कारण अब तो मनरेगा योजना के लिए सामग्री देना ही बंद कर दिया है।

राजेंद्र कुमार,फर्म संचालक, मंझनपुर


हमारे यहां से क्षेत्र के कई गांवों में सामग्री की सप्लाई दी जाती है। करीब एक साल से सामग्री का भुगतान नहीं हुआ है। जब तक बकाया भुगतान नहीं होगा, तब तक कोई भी नई सप्लाई नहीं दी जाएगी। रमेश अग्रहरि, फर्म संचालक,करारी



ब्लॉकवार भुगतान (लाख रुपये में)

चायल 70.38

कड़ा 87.30

कौशाम्बी 95.86

मंझनपुर 319.10

मूरतगंज 341.83

नेवादा 107.41

सरसवां 76.83

सिराथू 400.35



योग- 1499.06



छह माह से नहीं मिला मानदेय, 350 कर्मियों की फीकी होगी होली

मनरेगा योजना के संचालक के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायतों में रोजगार सेवकों की तैनाती की गई है। इसके अलावा तकनीकी सहायक, एपीओ, लेखाकार व कंप्यूटर ऑपरेटर की नियुक्ति की गई है। संविदा पर नियुक्त इन कर्मियों की संख्या जिले भर में साढ़े तीन सौ के आसपास है। ग्राम रोजगार सेवक संघ के जिलाध्यक्ष जितेंद्र शर्मा ने बताया कि पिछले छह माह से किसी भी मनरेगा कर्मी को मानदेय नहीं मिला है। अफसर जल्द ही ग्रांट आने का आश्वासन भर दे रहे हैं।

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शासन से ग्रांट रिलीज होते ही वीडियो का डोंगल लगाकर फर्म में भुगतान किया जाएगा। इसके लिए पूर्व से आदेश आ जाता है। ब्लॉकों में भुगतान की सारी फाइलें तैयार हैं। ग्रांट आते ही सभी का भुगतान कर दिया जाएगा।
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-मनोज वर्मा,-डीसी मनरेगा
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