मंझनपुर। पूर्णिमा यानी 11 जून से गुरु पश्चिम में विराजेंगे। इसके बाद मांगलिक कार्य के साथ शहनाई की धुन थम जाएगी। सूर्य के दक्षिणायन होने से चातुर्मास शुरू हो जाएगा। इसके बाद अगले छह महीने तक शहनाई की धुन नहीं गूंजेगी। छह माह बाद यानी नवंबर से मांगलिक कार्य शुरू होंगे।
ज्योतिषाचार्य डॉ. रामसियासन शास्त्री ने बताया कि ग्रहों के राजा सूर्य माने गए हैं और मंत्री गुरु ग्रह हैं। गुरु ग्रह के साक्षी होने पर ही विवाह व मांगलिक कार्य होते हैं। ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि यानी 11 जून की शाम 6:54 बजे गुरु ग्रह पश्चिम दिशा में अस्त होंगे। गुरु ग्रह के अस्त होने के साथ सभी मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा।
आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी छह जुलाई को देवशयनी एकादशी मनाई जाएगी। इसी दिन देवगुरु भगवान विष्णु शयन मुद्रा में चले जाएंगे। जबकि सूर्य दक्षिणायन हो जाएंगे। इसके साथ ही चातुर्मास भी शुरू हो जाएगा। फिर एक नवंबर को देवउठनी एकादशी पर भगवान श्रीहरि विष्णु जागृत होंगे। इसके बाद मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। वैवाहिक लग्न 21 नवंबर से शुरू होंगे जो 15 दिसंबर तक चलेंगे।
इन मांगलिक कार्यों पर लगेगी रोक
गुरु के अस्त होने और सूर्य के दक्षिणायन होने से मांगलिक कार्यों पर रोक लगेगी। साथ ही वधु प्रवेश, सगाई, मुंडन, गृह प्रवेश, मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा, यज्ञोपवीत और जनेऊ आदि आयोजनों पर विराम लग जाएंगे।