जैव विविधताओं से भरपूर अलवारा झील भीषण गर्मी और लू के वक्त प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम के रूप में अहम भूमिका निभा रही है। लेकिन राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र में दर्ज होने के बावजूद झील को अब तक वेटलैंड और रामसर स्थल का दर्जा नहीं मिल सका है।
महेवाघाट क्षेत्र में करीब 400 हेक्टेयर में फैली अलवारा झील प्रवासी पक्षियों, दुर्लभ जलीय जीवों और प्राकृतिक वनस्पतियों का सुरक्षित ठिकाना है। सर्दियों में यहां विदेशी पक्षियों का जमावड़ा लगता है। इसके बावजूद झील संरक्षण के लिए अब तक कोई ठोस कार्ययोजना सामने नहीं आई।
विशेषज्ञों के अनुसार रामसर स्थल घोषित होने के बाद झील क्षेत्र में अतिक्रमण, अवैध खनन और प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा। साथ ही भूजल स्तर सुधारने, तापमान संतुलित रखने और पर्यटन के जरिए स्थानीय रोजगार बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
इस मामले में डीएफओ पंकज कुमार शुक्ला ने बताया कि अलवारा झील को वेटलैंड अधिसूचित करने की कार्यवाही शासन स्तर पर चल रही है। जिले से वांछित सभी सूचनाएं भेजी जा चुकी हैं। कुछ दिनों के भीतर ही वेटलैंड की अधिसूचना जारी होने की संभावना है। इसके बाद अलवारा झील को रामसर स्थल का दर्जा दिलाने की कार्यवाही शुरू हो जाएगी। संवाद
शासन की वन डिस्ट्रिक्ट-वन वेटलैंड योजना के तहत अलवारा झील को चयनित किया गया है। इस पर बहुत तेजी से काम चल रहा है। बहुत जल्द ही इसके सुखद परिणाम सामने आएंगे।
- विनोद राम त्रिपाठी सीडीओ।
अलवारा झील कौशाम्बी जिले की अमूल्य धरोहर है। इसके संरक्षण, विकास और रामसर स्थल का दर्जा दिलाने के लिए राज्य और केंद्र सरकार के स्तर पर सभी प्रयास किए जाएंगे।
- पुष्पेंद्र सरोज सांसद, लोकसभा कौशाम्बी