पीकर चेक की जाती है दूध की गुणवत्ता, नहीं है लैक्टोमीटर
जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र में बच्चों को दिए जा रहे दूध का हाल
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती होने वाले कुपोषित बच्चों को दिए जाने में वाले दूध की गुणवत्ता का ख्याल नहीं रखा जा रहा है। बच्चों को खुला दूध तो दिया ही जा रहा है। साथ ही दूध की गुणवत्ता चेक करने के लिए केंद्र में लैक्टोमीटर नहीं है। ऐसे में पुनर्वास केंद्र के कर्मचारी खुद दूध पीकर गुणवत्ता का पैमाना निर्धारित करते हैं।
जिले में आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ता के अलावा स्वास्थ्य विभाग की आरबीएसके टीम कुपोषित बच्चों को चिन्हित करती है। अति कुपोषित बच्चों को जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया जाता है। यहां बच्चा व उसकी मां को कम से कम 14 दिन भर्ती रखा जाता है। कुपोषित बच्चे को रोजाना एक लीटर दूध दिया जाता है, लेकिन यहां बच्चों को पिलाए जाने वाले दूध की गुणवत्ता भगवान भरोसे रहती है। दूध की गुणवत्ता मापने का यहां कोई यंत्र नहीं है। पोषण केंद्र के कर्मचारियों का कहना है गुणवत्ता मापने के लिए लैक्टोमीटर की आवश्यकता होती है। कई बार डिमांड के बाद भी लैक्टोमीटर नहीं मिल सका। नतीजतन मजबूरी में यहां का स्टाफ दूध की गुणवत्ता या तो खुद दूध पीकर चेक करता है या फिर दूध के पतला या गाढ़ा होने को लेकर करता है। दूधिए का दूध इस्तेमाल किया जाता है। जिले में पैकेट वाले दूध की सप्लाई नहीं है।
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सालभर में 224 पीड़ित हुए भर्ती
मंझनपुर। पोषण पुनर्वास केंद्र में वर्ष 2019 में करीब 224 कुपोषित बच्चे भर्ती किए गए। जबकि यहां भर्ती होने वाले बच्चों के घरवालों को सरकार की तरफ से रोजाना 50 रुपये दिए जाते हैं। एक बच्चे को कम से कम 14 दिन देखरेख में रखा जाता है। 15 फीसद तक वजन बढ़ने के बाद ही बच्चे को डिस्चार्ज किया जाता है। बच्चे को भर्ती कराने वाले आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को 150 रुपये पारिश्रमिक दिया जाता है।
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जिले में 40 हजार बच्चे हैं कुपोषित
मंझनपुर। जिले में आंगनबाड़ी और आरबीएसके टीम ने करीब 40104 बच्चों को कुपोषण की श्रेणी में रखा है। इसमें कुपोषित और अति कुपोषित बच्चे शामिल है। तमाम प्रयास के बाद भी बच्चों को पोषण केंद्र में भर्ती नहीं कराया जा रहा। इसके कारण कुपोषण के खात्मे की मंशा जिले में साकार होती नजर नहीं आ रही।
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इनका कहना है
पोषण पुनर्वास केंद्र में कुपोषित बच्चों को भर्ती कर उनकी सेहत का ध्यान रखा जाता है। बच्चों को भर्ती कराने की जिम्मेदारी बाल विकास विभाग की है। तमाम प्रयास के बाद भी बच्चों का केंद्र में दाखिला काफी कम हो रहा है। इसके लिए रिमाइंडर भेजा जाता है।-डॉ. दीपक सेठ, सीएमएस, जिला अस्पताल