परिषदीय स्कूलों के साथ ही शासन ने माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की कुंडली खंगालना शुरू कर दिया है। राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त एवं संस्कृत विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक/शिक्षिकाओं के शैक्षणिक अभिलेखों की बारीकी से जांच कराने का निर्देश दिया गया है। इसके लिए एडीएम की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। डीआईओएस ने जिले भर में संचालित विद्यालयों में कार्यरत प्रधानाचार्यों को पत्र जारी कर निश्चित प्रारूप में अभिलेख तलब किया है। इसे लेकर जालसाजी कर नौकरी करने वालों में हड़कंप मचा हुआ है।
परिषदीय स्कूलों में फर्जीवाड़ा कर शिक्षक की नौकरी हासिल करने वालों का लगातार खुलासा हो रहा है। प्रदेश भर में बड़े पैमाने पर नियुक्ति में हुए इस खेल से शासन चौकन्ना हो गया है। लिहाजा शासन ने बेसिक शिक्षा के साथ ही माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से संचालित राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त एवं संस्कृत विद्यालयों में कार्यरत समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं के नियुक्तियों की जांच कराने का निर्देश दिया है। इसके लिए शासन की ओर से अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला द्वारा जिलाधिकारी को भेजे गए पत्र में एडीएम की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय टीम गठित किया है। समिति का नोडल मंडलीय उप शिक्षा निदेशक माध्यमिक शिक्षा को बनाया गया है।
जबकि डीआईओएस, राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य,प्रतिष्ठित एडेड स्कूल के प्रिंसिपल को सदस्य नामित किया गया है। समिति को जनपद में कार्यरत शिक्षकों के शैक्षणिक अभिलेखों का सत्यापन संबंधित संस्थाओं से हफ्ते भर के भीतर कराकर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। डीआईओएस एसके सिंह ने बताया कि जिले भर में संचालित राजकीय, एडेड एवं संस्कृत विद्यालयों में प्रधानाचार्यों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों की संख्या तकरीबन नौ सौ के आसपास है। शासकीय फरमान मिलने के बाद सभी प्रधानाचार्यों को निश्चित प्रारूप में समस्त अभिलेख डीआईओएस कार्यालय में प्रस्तुत करने का निर्देश दे दिया गया है। इसे लेकर जालसाजी कर नौकरी करने वालों में हड़कंप मच गया है।