घटना के लिए गांव के ही पांच लोगों के खिलाफ थाना पुलिस समेत पुलिस के आला अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिया था, लेकिन घटना की रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। इससे मजबूर होकर वादी ने कोर्ट में मुकदमा दाखिल किया। कोर्ट के आदेश पर घटना के चार महीने बाद सैनी कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज हुई।
अपर जिला जज फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वित्तीय पूर्णिमा प्रांजल की अदालत ने सैनी कोतवाली के एक गांव से करीब सत्रह साल पहले किशोरी के अपहरण व दुष्कर्म के मामले में दोषी को दस साल की कठोर कैद व दस हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। वादी अभियोजन के अनुसार 25 अप्रैल 2007 की शाम छह बजे सैनी कोतवाली के एक गांव से वादी की 15 वर्षीय बेटी को कुछ लोगों ने अगवा कर लिया था।
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घटना के लिए गांव के ही पांच लोगों के खिलाफ थाना पुलिस समेत पुलिस के आला अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिया था, लेकिन घटना की रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। इससे मजबूर होकर वादी ने कोर्ट में मुकदमा दाखिल किया। कोर्ट के आदेश पर घटना के चार महीने बाद सैनी कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज हुई। दौरान विवेचना पुलिस ने किशोरी को बरामद करके आरोपी ललई उर्फ मिथिलेश के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया।
मुकदमें का ट्रायल अपर जिला जज फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वित्तीय की अदालत में किया गया। विचारण के दौरान कोर्ट में एडीजीसी अनिल कुमार चौधरी ने वादी व पीड़िता दस गवाहों को न्यायालय में पेश करके गवाही कराई। बहस करते हुए एडीजीसी ने दोषी के अपराध को गंभीर बताते हुए सख्त से सख्त सजा सुनाने का अनुरोध किया।
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बचाव पक्ष की ओर से आरोपी की सजा में नरमी बरतने की अपील की। दोनों ओर से की गई बहस व पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्य का अवलोकन करने के बाद कोर्ट ने दोषी को दस वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने दस हजार रुपए का अर्थ दंड भी लगाया है। अर्थ दंड न जमा करने पर बीस दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।