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Muhurt : एक को जागेंगे श्रीहरि, शालिग्राम व तुलसी की होगी पूजा, 18 नवंबर से शुरू होंगे शुभ कार्य

Fri, 24 Oct 2025 06:50 PM IST
विनोद सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, करारी (कौशाम्बी)

सार

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देव उठनी एकादशी कहते हैं। देवउठनी एकादशी का व्रत अत्यधिक पुण्यदायक माना जाता है। इसे प्रबोधिनी एकादशी और देवोत्थान एकादशी भी कहा जाता है।
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शुभ मुहुर्त। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देव उठनी एकादशी कहते हैं। देवउठनी एकादशी का व्रत अत्यधिक पुण्यदायक माना जाता है। इसे प्रबोधिनी एकादशी और देवोत्थान एकादशी भी कहा जाता है। एक नवंबर को एकादशी पर शालिग्राम व तुलसी पूजन का शुभ मुहूर्त है। 18 नवंबर से मांगलिक कार्यों की शुरुआत होगी। ऐसे में शहनाई की गूंज भी सुनाई देने लगेगी।

पंडित ज्ञानेंद्र शास्त्री ने बताया कि शास्त्रों के मुताबिक, इस दिन भगवान विष्णु चार मास की निद्रा के बाद जागते हैं। इस दिन से सभी शुभ कार्य आरंभ हो जाते हैं। इस बार शुक्र अस्त होने के कारण 17 दिन बाद शुभ कार्य शुरू होंगे। जब तक शुक्र ग्रह उदय नहीं होता, तब तक विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन, नामकरण और अन्य मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है।

उन्होंने बताया कि देवोत्थानी एकादशी एक नवंबर को है लेकिन तीन नवंबर से ही शुक्र अस्त हो जाएंगे और 17 नवंबर को उदय होंगे। ऐसे में 18 नवंबर से शहनाई की गूंज भी सुनाई देने लगेगी। पहला विवाह मुहूर्त 21 नवंबर को है।

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पंडित देवेश शुक्ल ने बताया कि इस साल (हिंदू नववर्ष) के शेष महीनों में अब विवाह के केवल 22 मुहूर्त हैं। नवंबर में विवाह के पांच, दिसंबर में केवल तीन मुहूर्त हैं। 15 दिसंबर से खरमास के चलते फिर मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। ग्रहों की स्थिति ऐसी है कि खरमास के बाद भी पांच फरवरी तक विवाह का कोई मुहूर्त नहीं है। छह फरवरी से 10 मार्च तक विवाह के कई मुहूर्त मिलेंगे। 19 मार्च को वर्तमान विक्रमी संवत का समापन हो जाएगा।

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विवाह के मुहूर्त

- नवंबर-21, 23, 24, 26, 30

- दिसंबर- 01, 04, 05

- फरवरी-6, 8, 11, 12, 13, 15, 19, 20, 26

- मार्च-4, 5, 8, 9, 10

देवोत्थान एकादशी के साथ ही चातुर्मास खत्म हो जाएंगे

पंडित ज्ञानेंद्र शास्त्री ने बताया कि देवोत्थान एकादशी की तिथि एक नवंबर को प्रातः 09:11 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन 02 नवंबर को प्रातः 07:31 बजे तक रहेगी। ऐसे में एकादशी व्रत गृहस्थ लोग एक नवंबर शनिवार को करेंगे। वहीं वैष्णव आदि लोग उदया तिथि एकादशी व्रत के साथ देवोत्थान दो नवंबर को मनाएंगे।

देवोत्थान एकादशी के साथ ही चातुर्मास खत्म हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस दिन भगवान शालिग्राम और देवी तुलसी का विवाह भी होगा। भगवान शालिग्राम की पूजा के विषय और शुभ मुहूर्त की जानकारी देते हुए बताया कि इस दिन अभिजित मुहूर्त प्रातः 11:42 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक रहेगा। अमृत काल प्रातः 11:17 बजे से दोपहर 12:51 बजे तक रहेगा। रवि योग प्रातः 06:33 मिनट से शाम 06:20 तक रहेगा।

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