कड़ा। गंगा के किनारे स्थित कालेश्वर घाट में भगवान शिव का देवालय प्रशानिक उपेक्षा का शिकार हो गया। पांडवों के द्वारा स्थापित शिवलिंग में पूजा के लिए लोग पहुंचे तो जरुर लेकिन उन्हें तमाम तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा। मंदिर तक न जाने का रास्ता था और न ही अन्य जरुरी सुविधाएं।
नतीजतन लोग यहां जलाभिषेक करने पहुंचे तो जरूर लेकिन उन्हें तमाम तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
शीतला धाम कड़ा के कालेश्वर घाट के किनारे भगवान शिव का मंदिर है। मान्यता है इस मंदिर में शिवलिंग की स्थापना पांडवों ने अज्ञातवाश के दौरान किया था। बताया जाता है कि यहां युधिष्ठिर ने भगवान शंकर की पूजा की थी। हर साल शिवरात्रि के मौके पर यहां लोगों की भीड़ लगती है।
इस बार भी मंदिर में लोगों की भारी भीड़ जुटी लेकिन लोग आस्था के नाम पर यहां से दर्द लेकर लौटे। मंदिर के समीप ग्राम समाज ने गड्डे करवा दिए थे। इसके अलावा यहां आने वाला रास्ता भी बंद था। मंदिर का रंगरोगन भी नहीं कराया गया था। मंदिर की प्राचीन दीवार में दरार आ चुकी थी। नतीजतन लोग मंदिर तो किसी तरह पहुंचे लेकिन उन्हें तमाम तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ा। विरासत की दुर्दशा पर इलाके के लोग आहत है।
यहां दारानगर, देवीगंज, थुलगुला, टेढ़ीमोड़, कमंगलपुर सहित दो दर्जन गांव के लोग आते हैं। इस बार यहां आने वाले भक्तों को तमाम तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
सुरक्षा को लेकर लगवाई गई थी जाली
सरों ने मंदिर का भले ही जीर्णोद्धार करने का दावा किया हो, लेकिन शुक्रवार को व्यवस्था चिराग तले अंधेरे सरीखे दिखी। अफसरों ने गड्डों को तो नहीं भरवाया लेकिन जाली लगाकर खानापूरी करने का प्रयास किया।
गंगा यात्रा भी नहीं कर सकी मंदिर का विकास
कड़ा। कलेश्वर घाट के समीप ही गंगा यात्रा का पड़ाव था। प्रदेश के डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा भी कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। यात्रा के दौरान गंगा घाटों की साफ-सफाई कराया गया। इसके बाद भी प्राचीन मंदिर की तरफ किसी का ध्यान नहीं गया।
यह बात सही है कि कलेश्वर घाट स्थित शिव मंदिर का बदहाल है। उसकी मरम्मत कराने के लिए ग्राम सभा को कहा गया है। प्रस्ताव पास होने के बाद मंदिर की मरम्मत कराया जाएगा।
राकेश श्रीवास्तव, एसडीएम सिराथू