बोर्ड परीक्षा के लिए बनाए गए केंद्रों के निर्धारण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आ रही है। संसाधन विहीन अथवा पूरे साल ताला बंद रहने वाले स्कूल भी सेंटर बना दिए गए हैं। दूसरी तरफ सुविधाओं से लैश विद्यालयों को सूची से बाहर रखा गया है। मानकों को दरकिनार कर बनाए गए परीक्षा केंद्रों से बोर्ड परीक्षा की शुचिता पर अभी से सवाल खड़े होने लगे हैं।
वर्ष 2018 में नलकविहीन पारदर्शी बोर्ड परीक्षा कराने के लिए बुधवार को माध्यमिक शिक्षा परिषद ने केंद्रों का निर्धारण कर दिया है। कौशाम्बी जिले के 51 हजार परीक्षार्थियों के लिए इस बार 65 स्कूलों को सेंटर बनाया गया है। बोर्ड की ओर से जारी की गई केंद्रों की अनंतिम सूची पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले बोर्ड ने स्कूलों से 16 बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी थी। इनमें स्कूल भवन, सीसीटीवी कैमरा, जेनरेटर संपर्क मार्ग, शौचालय, शुद्ध पेयजल, लिंटर्ड कमरे, फर्नीचर, कम्प्यूटर कक्ष आदि बिंदु शामिल थे। स्कूलों की रिपोर्ट ऑनलाइन होने के बाद डीआईओएस से तस्दीक कराई गई थी। इन सभी कवायदों से माना जा रहा था कि इस मर्तबा साफ-सुथरे और संसाधनों से लैश कॉलेजों को ही परीक्षा केंद्र बनाया जाएगा। मगर ऐसा नहीं हुआ।
सूची में शामिल एक स्कूल का नाम देखकर लोग हैरान हैं। जीआईसी अमिरतापुर को छह सौ से अधिक छात्रों का परीक्षा केंद्र बना दिया गया है। इस कॉलेज की जबकि इस विद्यालय के पास न तो भवन है न ही चहारदीवारी। फर्नीचर और दूसरे संसाधनों का भी अभाव है। इसके विपरीत सुविधाओं से लैश जीआईसी कड़ा और सिराथू को केंद्र की सूची से बाहर रखा गया है। इसके अलावा कई ऐसे स्कूलों को केंद्र बना दिया गया जहां छात्रों को बैठने की व्यवस्था और सीसीटीवी कैमरे समेत दूसरे संसाधन भी नहीं हैं। सूची में शामिल ज्यादातर कॉलेज ऐसे हैं जो सिर्फ परीक्षा के वक्त ही गुलजार होते हैं। बाकी दिनों में यहां ताला बंदी जैसी स्थिति रहती है। इसके बाद भी उन्हें केंद्र बना दिया गया। इसके चलते बोर्ड परीक्षा की शुचिता को लेकर अभी से ही सवाल खड़े किए जा रहे हैं।