यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई करने गया मंझनपुर का साकिब सकुशल वापस आ गया है। फिलहाल, सफर की थकान के कारण वह दिल्ली में रहने वाले रिश्तेदार के यहां ठहरा है। परिवार के लोगों से उसने वीडियो कॉल के जरिए बात की तो घरवालों ने राहत महसूस की।
मंझनपुर कस्बा निवासी आबिद के पिता डॉ. महमूद चिकित्सक थे। पिता के गुजर जाने के बाद उनका चिकित्सा व्यवसाय बेटों ने संभाला। इसी वजह से आबिद ने अपने इकलौते बेटे साकिब महमूद को एमबीबीएस करने के लिए यूक्रेन भेजा था। साकिब एमबीबीएस में तीसरे वर्ष का छात्र है। यूक्रेन में रूस की कार्रवाई के बाद साकिब वहां फंस गया। उसकी वतन वापसी को लेकर परिवार के लोग बेहद परेशान थे। साकिब ने पिछले दिनों फोन पर बताया था कि वह दूतावास के पास है। पोलैंड बार्डर के लिए ट्रेन का इंतजार कर रहा है।
पास में खाने का कुछ भी सामान नहीं बचा। वह चिप्स, बिस्किट व नमकीन खाकर दिन काट रहा है। उसके मोबाइल की बैट्री डाउन हो चुकी थी। इस पर घरवालों से संपर्क भी नहीं हो रहा था। शुक्रवार को अमर उजाला से बातचीत में साकिब के पिता आबिद ने बताया कि उनका बेटा बृहस्पतिवार रात दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरा। उसने अपनी वीडियो कॉल करके परिवार को अपनी कुशलता की जानकारी दी। बताया कि वह सफर में काफी थक चुका है। इस पर घरवालों ने दिल्ली में ही रहने वाले एक रिश्तेदार के यहां उसे ठहरा दिया है। आबिद ने बताया कि बेटा सकुशल है, यहीं बड़ी बात है। शनिवार को साकिब घर आएगा।
हंगरी के रास्ते फ्लाइट से दिल्ली पहुंचा यूक्रेन में फंसा प्रमोद
यूक्रेन के खारकीव शहर में फंसा कौशाम्बी का मेडिकल छात्र प्रमोद कुमार सिंह शुक्रवार की भोर इंडियन फ्लाइट से अपने साथी हेमंत के साथ सकुशल दिल्ली पहुंच गया। वह दिल्ली से तेजस एक्सप्रेस से कानपुर के लिए रवाना हो गया। अपने वतन लौटने पर मेडिकल छात्र ने राहत की सांस ली। प्रमोद का कहना है कि यह केंद्र की देन है कि सकुशल युद्ध क्षेत्र से अपने परिजनों के बीच पहुंच रहा है।
सिराथू तहसील के चकमानिकपुर सैयरदाराजे निवासी वीरेंद्र सिंह का बेटा प्रमोद सिंह मेडिकल की पढ़ाई करने यूक्रेन गया हुआ था। वह यूक्रेन के सबसे बड़े शहर खारकीव के एक मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस प्रथम वर्ष का छात्र है। रूस द्वारा यूक्रेन पर हमला किए जाने के साथ खारकीव शहर को सेना ने निशाने पर ले लिया था। शहर में हमला होने से छात्र प्रमोद ने कई दिन अपने हॉस्टल में बने बंकर में भूखे-प्यासे रहकर बिताई।
भारतीय दूतावास की मदद से वह अपने वतन के लिए निकल पड़ा। बृहस्पतिवार को प्रमोद अपने साथी हेमंत निवासी महोबा व अन्य भारतीय छात्रों के साथ फ्लाइट में सवार हुआ। प्रमोद ने अमर उजाला को बताया कि वह शुक्रवार की भोर में पांच बजे अपने दोस्त हेमंत के साथ दिल्ली एयरपोर्ट पर उतर गया। यहां से वह अपने दोस्त के साथ 3.40 बजे सुपर फास्ट ट्रेन में कानपुर के लिए सवार हो गया है। तकरीबन पांच घंटे में यह ट्रेन उसे कानपुर पहुंचा देगी। उधर, अपने वतन लौटकर आ जाने की खबर से परिजनों के चेहरे खुशी से खिल उठे। परिजनों का कहना है कि भगवान ने परिवार को बहुत बड़े संकट से बचा लिया।