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पीतल नगरी की सड़कें खराब, आवास भी अधूरे

Mon, 26 Jun 2017 12:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
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कौशाम्बी
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 पीएम मोदी के आह्वान पर सांसद विनोद सोनकर ने भी शमसाबाद गांव को गोद लिया है। तीन साल बाद बीत गए सांसद के गोद लिए गांव को। कई वादों के साथ यहां परियोजनाएं शुरू हुई, लेकिन सब आधी अधूरी हैं। छात्राओं के लिए कालेज व मिनी स्टेडियम का तो प्रस्ताव ही नहीं बन सका। वह हवाहवाई ही रहा। मुख्यमार्ग से शमसाबाद को जाने वाला मार्ग गड्ढों में तब्दील है। यूपी में बीजेपी सरकार बनने के बाद भी यहां चल रही परियोजनाओं में तनिक भी तेजी नहीं आई है। इससे ग्रामीणों के बीच तमाम तरह की चर्चाएं हैं।
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    वर्ष 2014 में बीजेपी सांसद विनोद सोनकर ने शमसाबाद गांव को गोद लिया था। यह गांव अब आदर्श गांव के नाम से जाना जाता है। यहां की आबादी लगभग 65 सौ है। कसेरा समाज के लोग यहां बहुसंख्यक हैं। पीतल नगरी के नाम से देश के कोने-कोने में यह गांव विख्यात है। पीतल के बने नक्कासीदार बर्तन ही इस गांव की पहचान हैं। यही कारण है कि सांसद ने इस गांव को बहुत सोच-समझ गोद लिया था। ग्रामीणों का कहना है कि सांसद ने गांव को गोद लेने के बाद ऐलान किया था कि यहां सीएचसी, शवदाह गृह, पेयजल टंकी, विद्युतीकरण, सोलर लाइट, प्रधानमंत्री आवास योजना, शौचालय, छात्राओं के लिए डिग्री कालेज, मिनी स्टेडियम, ढाई किमी तक की सीसी रोड, नाली, अतिरिक्त सोलर लाइट लगवाई जाएगी। तीन साल बीत गए, लेकिन इस गांव में फिलहाल सुविधाएं नहीं दिख रही है। निर्माणाधीन परियोजनाओं का हवाला देकर भाजपा के नेता अपनी पीठ थपथपा रहे हैं।

13 लाख की लागत से शव दाह गृह बन रहा है, लेकिन प्रगति नहीं है। तीन करोड़ 50 लाख की लागत से पेयजल टंकी व पाइप लाइन बिछाने का भी काम अधर में अटका है। एक करोड़ 57 लाख की लागत से सीएचसी का निर्माण शुरू हुआ, लेकिन कार्य पूरा नहीं हो सका। 26 लाख से विद्युतीकरण होना था, 25 फीसदी भी काम नहीं हो सका। 35 सोलर लाइट लगी, लेकिन 40 अतिरिक्त सोलर लाइट का वादा, वादा ही रहा। आवास और शौचालय का लाभ लोगों को जरूर मिला। यहां के ग्रामीणों को सबसे ज्यादा दुख इस बात का साल रहा है कि सांसद उनके गांव आते ही नहीं। तीन से चार बार ही वह गांव गए। इस दौरान ग्रामीणों से उनकी मुलाकात केवल मंच से हुई। नजदीक जाने का उनको मौका तक नहीं मिला, नतीजतन वह अपनी बात नहीं रख पाए।
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छात्राओं की हुई अनदेखी
सांसद विनोद सोनकर ने शमसाबाद गांव की छात्राओं से वादा किया था कि गांव में वह डिग्री कालेज बनवाएंगे। इसके अलावा गांवों में छिपी प्रतिभाओं को निखारने के लिए मिनी स्टेडियम बनवाने की भी बात कही गई थी। न तो कालेज का निर्माण हुआ न ही स्टेडियम का। इसका प्रस्ताव भी नहीं बन सका है। इससे शमसाबाद वह आसपास के गांवों की छात्राएं नाराज हैं।

सड़क तक नहीं बन सकी
सांसद के आदर्श गांव शमसाबाद को जाने वाला मार्ग जर्जर है। मुख्य मार्ग से शमसबाद मार्ग पर जैसे ही लोग प्रवेश करते हैं, उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सड़क कई जगह से टूट गई है। बड़े-बड़े गड्ढे हैं। इसकी कई बार लोगों ने शिकायत की, लेकिन समस्या दूर नहीं हो सकी। गड्ढा मुक्त योजना से भी यह सड़क अछूती रही। इसको लेकर लोगों में गुस्सा भी है।

भीषण गर्मी में है पानी का संकट
शमसाबाद गांव में पेयजल टंकी का निर्माण हो रहा है। करोड़ों की लागत से बन रही टंकी फिलहाल शुरू होने के दो साल बाद भी नहीं बन सकी है। इससे लोगों को पीने के पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। हैंडपंप पर लोगों को लाइन लगानी पड़ती है। सुबह और शाम पानी के लिए किचकिची भी होती है।

पीतल नगरी को संवारने की नहीं हो सकी पहल
शमबसाद पीतल नगरी के नाम से जानी जाती है। 20 साल पहले तक यहां पीतल का कारोबार अपने चरम पर था। सौ से ज्यादा कारीगर और पांच सौ से ज्यादा मजदूर रात-दिन काम करते हैं। एक दर्जन से ज्यादा यहां अभी कारखाने हैं, लेकिन इनका ढांचा ही अब बचा है। काम नहीं होता है। कच्चा माल न मिलने की वजह से यहां का कारोबार ठप हो गया है। सांसद ने वादा किया था कि इस उद्योग को बढ़ावा देेंगे, लेकिन यह भी कागजों तक ही सीमित है।
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