शासन की महत्वाकांक्षी समाजवादी पेंशन योजना जिले के अफसरों की मनमानी की भेंट चढ़ गई है। योजना के तहत चयन किसी का है पर धन कोई और निकाल रहा है। यही नहीं पात्रों को दरकिनार कर खेतिहर, ट्रैक्टर और आलीशान मकान के मालिक पेंशन का लाभ पा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि आखिर जिला प्रशासन कर क्या रहा है।
प्रदेश सरकार ने गरीबों को राहत देने के लिए समाजवादी पेंशन योजना की शुरुआत की। मगर योजना में तत्कालीन ग्राम प्रधानाें और सेक्रेटरियों ने जमकर खिलवाड़ किया। पात्रों के चयन के दौरान ग्राम प्रधानों ने अपने चहेतों के नाम पेशन की स्वीकृति करा दी। कौशाम्बी ब्लॉक क्षेत्र में चयनित समाजवादी पेंशनरों पर नजर डालें तो योजना में 7350 लोग शामिल हैं। इनमें से लगभग दो हजार पेंशनर ऐसे हैं जो किसी न किसी तरह से अपात्र है। कुछ पात्र पेंशनर हैं जिनकी पेंशन स्वीकृत है।
उनके खाते में पेंशन भी जा रही है लेकिन भुगतान कोई और कर ले रहा है। ऐसा ही एक मामला ब्लॉक क्षेत्र के फजुल्लापुर गांव का सामने आया है। यहां की गुड्डी देवी पत्नी वीरेंद्र कुमार का खाता बीओबी कनैली में है। खाते में धनराशि पहुंचने के बाद पश्चिम शरीरा बैंक से इसी नाम के दूसरे खातेधारक ने धनराशि निकाल लिया। खाते से धनराशि गायब होने के बाद पीड़िता तीन माह से ब्लॉक का चक्कर काट रही है पर उसे न्याय नहीं मिल सका। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि समाजवादी पेंशन को लेकर शासन के नुमाइंदे कितने संजीदा है।