मंझनपुर। सिराथू क्षेत्र के गरई गांव में लगभग सात लाख में आरआरसी केंद्र को अगस्त माह में बनाकर तैयार कर लिया गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि सेंटर को सिर्फ कागजों में चालू दिखाकर अधिकारियों को गुमराह किया गया, जबकि जमीन पर न तो यहां कूड़ा निस्तारण हो रहा है और न ही किसी प्रकार की गतिविधि।
ग्रामीणों के मुताबिक आरआरसी सेंटर का उद्देश्य गांव से कचरा एकत्र कर वैज्ञानिक तरीके से उसका निस्तारण करना था, लेकिन उद्घाटन के बाद से आज तक यहां एक दिन भी काम नहीं हुआ। गांव के कई हिस्सों में कूड़े के ढेर लगे हैं।
ग्राम सचिव और प्रधान पर आरोप है कि उन्होंने सेंटर की फोटो खींचकर उसे चालू बताते हुए रिपोर्ट अधिकारियों को भेज दी। हैरानी की बात यह है कि बिना किसी मौके के सत्यापन के अधिकारियों ने भी रिपोर्ट को सही मान लिया, जिससे पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
गांव में आरआरसी सेंटर बने बहुत समय हो गया लेकिन इसमें लगा ताला आजतक नहीं खुला। गांव में चारों तरफ कूड़े के ढेर लगे रहते हैं इसके निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं है। -धनराज, ग्रामीण
आरआरसी सेंटर बनकर तैयार हुआ तो लगा अब गांव में फैले कूड़ों से छुटकारा मिलेगा लेकिन सेंटर तो सिर्फ कागजों के लिए ही बनकर तैयार हुआ था गांव में गंदगी की स्थिति आज भी जस की तस है। -मनीष, ग्रामीण
आरआरसी केंद्र तक जाने के लिए रास्ता नहीं बना है। ग्राम प्रधान और सचिव को बोला गया है, रास्ता बनते ही सेंटर को चालू करवा दिया जाएगा। -आफताब आलम प्रभारी सहायक विकास अधिकारी पंचायत, कड़ा
गरई गांव में बंद पड़ा आरआरसी केन्द्र। संवाद- फोटो : udhampur news
गरई गांव में बंद पड़ा आरआरसी केन्द्र। संवाद- फोटो : udhampur news
गरई गांव में बंद पड़ा आरआरसी केन्द्र। संवाद- फोटो : udhampur news