मंझनपुर/चरवा। रामनगरी फैजाबाद से चित्रकूट तक फोरलेन बनना मंजूर हुआ है। कौशाम्बी के जिला पंचायत सदस्य ने राम विश्रामस्थल चरवा से होकर फोरलेन बनाने की मांग केंद्र सरकार से की है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री को पत्र भी भेजा है। ऐसा हुआ तो पक्का है कि उपेक्षित पड़े जिले के इस धर्मस्थल का भी कायाकल्प हो जाएगा।
बता दें कि कौशाम्बी की चायल तहसील का चरवा गांव राम वनगमन से जुड़ा है। इसकी गवाही यहां स्थित अति प्राचीन ताल और बने पुराने मंदिरों से भी मिलती है। धार्मिक मान्यता है कि वन जाते समय भगवान राम यहां एक रात विश्राम किए थे। सुबह इसी प्राचीन ताल में उन्होंने स्नान किया था। तभी से इस ताल का नाम रामजूठा तालाब हो गया है। भू-अभिलेखों में भी यह इसी नाम से दर्ज है। करीब 50 बीघे का यह ताल आज अतिक्रमण का शिकार है। साथ ही अनदेखी के कारण यह ऐतिहासिक, धार्मिक महत्व का ताल आज सूखा पड़ा है। इसी तरह से मौजूद प्राचीन मंदिर भी उपेक्षित पड़े हैं।
इधर, फैजाबाद से चित्रकूट के लिए फोरलेन बनाए जाने की सूचना से यहां के लोगों का आस बंधी है कि शायद सड़क चरवा होकर बने। ऐसा हुआ तो इस धार्मिक स्थल का भी कायाकल्प हो जाएगा। जिला पंचायत सदस्य और कांग्रेसी नेता रजनीश पांडेय ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री को पत्र भेजकर यह फोरलेन सड़क राम विश्रामस्थल चरवा से होकर बनाए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि चरवा से होकर सड़क बनाए जाने से ही राम वनगमन मार्ग पूरा होगा। क्योंकि वाल्मीकि रामायण और मानस के मुताबिक श्रृंगवेरपुर, कुरईघाट, चरवा, भारद्वाज आश्रम, संगम, अक्षयवट, बलुआघाट होेते हुए ही भगवान श्रीराम यमुना पार करके चित्रकूट पहुंचे थे।
राम विश्राम स्थल चरवा के सौंदर्यीकरण का प्रयास कई बरसों से स्थानीय लोग करते आ रहे हैं। चरवा के रहने वाले जिला पंचायत सदस्य रजनीश पांडेय आदि इसके लिए लगातार शासन-प्रशासन को लिखापढ़ी की है। इतना ही नहीं क्षेत्रीय पर्यटक अधिकारी ने भी इस स्थल के सौंदर्यीकरण की कार्ययोजना बनाकर शासन को भेजी थी। इस कार्ययोजना पर राम विश्राम स्थल चरवा के सौंदर्यीकरण को 40-40 लाख की वार्षिक किश्तों पर 1.20 करोड़ रुपये की मंजूरी भी मिल चुकी है। हालांकि अभी सौंदर्यीकरण का कोई बजट जिला प्रशासन को प्राप्त नहीं हुआ है।
भरवारी उपकेंद्र से जुड़े बिसारा गांव में लगा ट्रांसफार्मर सोमवार की शाम अचानक फुंक गया था। इसके कारण चार दिनों से पूरे गांव की बत्ती गुल है। गांव में रहने वाले 60 परिवार रात अंधेरे में गुजारने को मजबूर हैं। गांव के रहने वाले रामपाल, देशराज सोनकर, शोभनाथ, राम खेलावन, राजरानी, पीतांबर लाल, रामसिंह यादव, धारा सिंह आदि ने बताया कि ट्रांसफार्मर जलने की सूचना मंगलवार को ही अवर अभियंता भरवारी को उपकेंद्र जाकर दी गई थी। पर, अब तक जला हुआ ट्रांसफार्मर खोलकर उसे स्टोर भेजा तक नहीं गया है।
विभागीय अफसरों और कर्मचारियों की इस मनमानी से गांववालों में गुस्सा है। ग्रामीण बताते हैं कि बिजली आपूर्ति के लिए गांव में सिर्फ 25 केवीए का ट्रांसफार्मर लगाया गया है। जबकि इससे 50 लोगों को घरेलू बिजली का कनेक्शन दे दिया गया है। लोगों का कहना है कि इसी ओवरलोड के कारण अक्सर ट्रांसफार्मर फुंकता रहता है। ग्रामीणों की मानें तो डेढ़ महीने पहले भी ट्रांसफार्मर जला था। तब करीब 15 दिन की भाग-दौड़ के बाद ट्रांसफार्मर बदला जा सका था। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार उच्चाधिकारियों से गांव में 63 केवीए का ट्रांसफार्मर लगवाने की मांग की जा चुकी है, लेकिन अफसर इस ओर ध्यान ही नहीं दे रहे हैं।