म्योहर। सदर तहसील के म्योहर गांव में कथित तालाबी रकबे पर निर्माण को लेकर बखेड़ा हो गया। ग्रामीणों के भारी विरोध पर पहुंचे प्रशासन ने निर्माण पर रोक लगा दिया। एसडीएम सदर ने पूरे मामले की जांच नायब तहसीलदार को सौंपी है।
म्योहर गांव के ग्रामीणों का कहना है कि जमींदारी के समय बस्ती के कहारों को सिंघाड़ा की खेती के लिए करीब 13 बीघे का तालाब दिया गया था। बाद में राजस्व विभाग की मिलीभगत से अभिलेखों में खेलकर इसे भूमिधरी दर्ज करा लिया गया। इतना ही नहीं अब उक्त भूमि की इलाहाबाद के दो व्यक्तियों के नाम रजिस्ट्री भी कर दी गई। इधर तीन-चार दिन से वह लोग दर्जन भर असलहाधारियों के साथ जेसीबी से भूमि बराबर करवा रहे थे। गुरुवार को निर्माण के लिए जेसीबी ने खुदाई शुरू की तो ग्रामीण भड़क गए। सैकड़ों की संख्या में पहुंचे बस्ती के ग्रामीण जेसीबी के सामने खड़े होकर प्रदर्शन करने लगे।
उनका कहना था कि जालसाजी कर भूमि का बैनामा किया गया है। वर्षों से इस तालाब में बस्ती का गंदा पानी गिरता चला आ रहा है। निर्माण के बाद से दिक्कतें बढ़ जाएंगी। इसी बीच सूचना पाकर पहुंचे करारी कोतवाल दोनों पक्षों को थाने बुला लाए। खबर मिलते ही एसडीएम सदर सतीश चंद्र भी कोतवाली पहुंच गए। ग्रामीणों के विरोध को देखते हुए एसडीएम ने फिलहाल निर्माण पर रोक लगाते हुए प्रकरण की जांच नायब तहसीलदार को सौंप दी है। उधर विक्रेता संतोष कुमार, लक्ष्मी नारायण, गुरू प्रसाद, रमेश, महेश का कहना है कि उक्त भूमि का ग्राम सभा की ओर से दशकों पहले पट्टा आवंटित हुआ था। वर्ष 1992 में जमीन भूमि धरी दर्ज हो चुकी है। इसके बाद ही उन लोगों ने 25 जुलाई 2018 को इलाहाबाद शहर के म्योराबाद निवासी रामधीरज तिवारी व लक्ष्मण कुमार नाम बैनामा किया है।