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कौशाम्बी में मिला 22 सौ साल पुराना शहर

Thu, 29 Dec 2016 12:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
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 पुरातत्व विभाग ने चायल तहसील के नीवीं शाना में सर्वे के दौरान 22 सौ साल पुराना शहर बसा होने की खोज की है। यह शहर शुंग-कुषाण काल में विकसित हुआ था। यहां से बड़े पैमाने पर कारोबार होता था। कुषाण काल में बौद्ध धर्म के मानने वाले अनुयायी ज्यादा थे। व्यापारिक दृष्टिकोण को देखते हुए यह शहर बसाया गया था। बीएचयू के प्रोफेसर एके दुबे, इलाहाबाद विश्व विद्यालय के प्रोफेसर जेएन पॉल और डॉ. कन्हैयालाल ने यह खोज की है। इस स्थल की खुदाई के लिए अब भारत सरकार से अनुमति मांगी गई है। प्रोफेसरों का कहना है कि अगले सत्र से यहां खुदाई की जाएगी।
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    नीवी शाना में एक तालाब की खुदाई के दौरान लोगों को पुरानी ईंट दिखी थी। इसकी जानकारी डीएम अखंड प्रताप सिंह को हुई तो उन्होंने बीएचयू के पुरातत्व विभाग के प्रोफेसर अनिल कुमार दुबे संपर्क किया। प्रोफेसर एके दुबे ने चायल तहसील प्रशासन के साथ नीवीं शाना का सर्वे किया तो पता चला कि कुषाण काल की यहां ईंटें हैं। इसके बाद वह दोबारा इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जेएन पाल और डॉ. कन्हैयालाल के साथ आए और खुदाई कराकर निरीक्षण किया। इस दौरान पता चला कि यहां कुषाण काल में शहर बसाया गया था। कई हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला था। प्रोफेसर  एके दुबे ने बताया कि लगभग 22 सौ साल पहले यहां शहर विकसित था। बौद्ध धर्म के अनुयायी यहां ज्यादा थे। कौशाम्बी एक व्यापारिक नगरी थी। व्यापार के दृष्टिकोण से ही इस शहर को गंगा नदी किनारे बसाया गया था। प्रोफेसर ने बताया कि इस संबंध में डीएम अखंड प्रताप सिंह से बातचीत हुई। यहां की जल्द ही खुदाई कराई जाएगी। इसके लिए भारतीय पुरातत्व विभाग को पत्र भेजा गया है। राज्य सरकार से एनओसी प्राप्त होने के बाद यहां की खुदाई कराई जाएगी।

झूंसी व हेतापट्टी में भी हैं कुषाण काल के शहर
प्रोफेसर एके दुबे ने बताया कि कुषाण काल के शहर गंगा व उसकी सहायक नदियों के किनारे ही बसाए जाते थे। आवागमन का जरिया गंगा नदी के मार्ग से ही होता था। शहर वहीं बसाएं जाते थे, जहां से व्यापार हो सके। उन्होंने बताया कि नीवीं शाना, कौशाम्बी तपोस्थली, झूंसी व हेतापट्टी में यह शहर थे। इन शहर के बीच आंतरिक व्यापार होता था। वाणिज्य के हिसाब से इनकी व्यवस्था मजबूत थी।
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