कच्चे माल की कमी और पेट्रोल-डीजल के दामों में हुई वृद्धि का असर दवाओं पर भी पड़ने लगा है। कोलेस्ट्रॉल, दिल, सांस, गर्भावस्था से जुड़ी दवाएं और एंटीबायोटिक की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। एलोपैथ के साथ आयुर्वेदिक दवाओं के दामों में तेजी आई है। बीते चार माह के दौरान दवा की कीमतों में पांच से 20 फीसदी तक वृद्धि हुई है। इसके अलावा कई अन्य जीवन रक्षक दवाएं ऐसी भी हैं, जिसे मरीजों को लंबे समय तक खाना पड़ता है। ऐसे मरीजों पर लगातार आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
पिछले चार माह से लगातार बढ़ रहे पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ रहे हैं। इसका असर दवाओं पर भी दिखाई पड़ रहा है। अधिकांश दवाओं की कीमतों में बीते कुछ माह के दौरान ज्यादा इजाफा हुआ है। दवाओं की बार-बार बढ़ रही कीमतों से आम लोगों के साथ संबंधित कारोबारी भी परेशान हैं।
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट मेडिकल एसोसिएशन के महामंत्री अशोक कुमार केसरवानी ने बताया कि कच्चे माल के दामों में वृद्धि और कमी की वजह से दवा की कीमतों में पांच से 20 फीसदी तक की वृद्धि हुई है। इसमें शुगर एवं बीपी के मरीजों के इस्तेमाल में आने वाली दवा की कीमत में पांच से 10 फीसदी और मल्टी विटामिन एवं एंटीबायोटिक्स के दामों में 20 फीसदी तक की तेजी आई है।
इसके अलावा पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का असर भी फार्मा इंडस्ट्री पर पड़ा है। ट्रांसपोर्टरों द्वारा किराया बढ़ा दिए जाने की वजह से भी तमाम कंपनियों ने दवाओं के दाम बढ़ा दिए हैं। ऐसे में मरीजों को संकट काल में परेशानी उठानी पड़ रही है।
एलोपैथिक के साथ आयुर्वेदिक दवाओं के भी बढ़ गए दाम
एलोपैथिक हीं नहीं, बल्कि आयुर्वेदिक दवाओं के दामों में भी करीब 15 फीसदी तक रेट बढ़े हैं। आयुर्वेदिक मेडिकल संचालकों के अनुसार तीन माह पहले जो लीव-52 टेबलेट 140 रुपये की आती थी अब उसके रेट 155 रुपये हो गए हैं। इसी तरह तुलसी वटी, श्वासारि प्रवाही, आंवला रस, हनी समेत कई दवाओं के दाम 10 से 15 फीसदी तक बढ़े हैं।
इन दवाओं के भी बढ़े दाम
- हल्के बुखार की दवा सिनारिस्ट सिरप का दाम 80 से बढ़कर 89 रुपये।
-दिल की दवा मेटाकार्ड एक्सएल का एक पत्ता 60 रुपये से बढ़कर 65 रुपये।
-ब्लड प्रेशर की ही मेटागार्ड सीआर 60 का दाम 167 से अब 175 रुपये।
-कोलेस्ट्रॉल की गोली रोजावेल 20 की कीमत 303 से बढ़कर 330 रुपये।
-गरारा करने वाली दवा बीटाडीन 210 के स्थान पर 230 रुपये।
-यूरिक एसिड की दवा फेबुस्टैट 40 का एक पत्ता 184 रुपये की जगह 202 रुपये।
-सांस की दवा एबी फ्लो कैप्सूल का एक पत्ता 112 की जगह 124 रुपये।
-एंबी फाइलीन 100 एमजी का एक पत्ता 123 रुपये की जगह 135 रुपये।
-शुगर के मरीजों को दी जाने वाली ग्लिमिप्रेक्स एमएफ-1, 500 एमजी का पत्ता 55 से बढ़कर 60 रुपये हो गया है।
दवाओं के दामों में वृद्धि हो रही है। कच्चे माल और पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से मालभाड़ा भी बढ़ा दिया गया है। हर दवा पर 10 से 20 फीसदी की वृद्धि हुई है।
- पंकज केसरवानी, पूर्व महामंत्री, केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट मेडिकल एसोसिएशन
कोरोना काल में आयुर्वेदिक दवाओं के दाम नहीं बढ़े थे। मगर तेल के दामों में हुई बढ़ोतरी के चलते आयुर्वेदिक दवाओं के दाम तेजी से बढ़ने शुरू हो गए हैं। सिरप, वटी और अन्य दवाओं के चूर्ण भी महंगे हुए हैं। जिसका असर दुकानदार और मरीजों पर पड़ रहा है।
रितेश अग्रहरि-संचालक, पतंजलि चिकित्सालय