नगर पंचायत भरवारी में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। ऐसा आरोप यहां के पार्षदों का है। नगर पंचायत को शासन से कितना बजट मिलता है, इस बारे में भी पार्षदों को कोई जानकारी नहीं दी जाती है। हाल ये है कि यहां पर पार्षदों को दरकिनार कर दिया गया है। नगर पंचायत भरवारी में मनमानी कार्यशैली को पार्षदों में नाराजगी बढ़ती ही जा रही है।
नगर पंचायत भरवारी में 12 वार्ड हैं। मौजूदा बोर्ड का गठन चुनाव के बाद जुलाई 2012 में हुआ। पार्षदों का आरोप है कि इसके बाद से अभी तक महज दो बार बोर्ड की बैठक बुलाई गई। इसके अलावा कभी बैठक नहीं हुई। शासन से हर साल लाखों रुपये नगर पंचायत क्षेत्र के विकास के लिए आवंटित किए जाते हैं। चार वित्तीय वर्ष बीत चुके हैं, मगर बजट के बारे में भी कोई जानकारी पार्षदों को नहीं दी जाती है। जबकि नियमानुसार पार्षदों की बैठक कर उनसे प्रस्ताव लिए जाने चाहिए।
इसके अलावा भी तमाम गंभीर आरोप पार्षदों ने लगाए। पार्षदों का कहना है कि मनमाने तरीके से प्रस्ताव पास करा लिए जाते हैं। ऐसे में सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर पार्षदों को नगर पंचायत भरवारी प्रशासन ने दरकिनार क्यों कर रखा है। यहां तक कि पहली बैठक में पार्षदों से लिए गए प्रस्ताव के काम भी अभी तक अधूरे पड़े हैं। मनमानी का आलम ये है कि इस मसले पर पूछने पर यहां के ईओ शिवलाल श्रीवास्तव और नगर पंचायत अध्यक्ष संजय गुप्ता एक दूसरे को जवाब देने की जिम्मेदारी कहकर टालमटोल करते रहे।
विकास कार्य के लिए पहली बैठक में जो प्रस्ताव दिए थे। वह भी अभी तक पूरा नहीं कराया गया है। पंचायत प्रशासन की मनमानी से जनता में आक्रोश है। जिसका खामियाजा पार्षद को भुगतना पड़ता है।
अभिजीत, पार्षद
नगर पंचायत प्रशासन पूरी तरह से मनमानी पर उतारू है। बोर्ड की बैठक केवल दो बार बुलाई गई है। यहां तक की पंचायत प्रशासन आरटीआई का भी कोई जवाब नहीं देता है।
मनोज कुमार, पार्षद
आरटीआई के सारे जवाब भेजे जाते हैं। बोर्ड की बैठक को लेकर सारी जिम्मेदारी नगर पंचायत अध्यक्ष संजय गुप्ता की है। इस बारे में वही कुछ बता सकते हैं।
शिवलाल श्रीवास्तव, अधिशासी अधिकारी
पंचायत क्षेत्र में विकास के कार्य कराए जा रहे हैं। सारे आरोप बेबुनियाद हैं। राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चलते विपक्ष के पार्षद मनमानी आरोप लगा रहे हैं।
संजय गुप्ता, नगर पंचायत अध्यक्ष