मंझनपुर। पंचायत चुनाव की मतगणना को लेकर प्रत्याशी के एजेटों ने कोरोना गाइड लाइन की धज्जियां उड़ा रखी हैं। शनिवार को ब्लॉक व जिला पंचायत कार्यालय में पास बनवाने के लिए लोग धक्कीमुक्की करते रहे। इस दौरान न कहीं पुलिस दिखी और न ही कहीं स्वास्थ्य विभाग के लोग। किसी भी जिम्मेदारों ने उक्त सियासी लोगों को दो गज की दूरी का पालन कराना जरूरी नहीं समझा।
पंचायत चुनाव की मतगणना के दौरान इस बार प्रत्याशी के अभिकर्ताओं को कोविड-19 की जांच कराने के बाद ही पास जारी किए जाने का प्राविधान किया गया है। ज्यादातर लोगों की इसकी जानकारी शुक्रवार को हो सकी। नतीजतन सभी सीएचसी व पीएचसी में शनिवार सुबह से ही जांच कराने वालों की लंबी कतारें लग गईं। यही हाल जिले के ब्लॉक व जिला पंचायत कार्यालय में भी रहा। ब्लॉकों में जहां, बीडीसी, प्रधान पद के लिए पास बनवाने वालों की भीड़ रही वहीं, जिला पंचायत सदस्य पद के लिए जिपं. कार्यालय में लोग एक-दूसरे से सट कर खड़े रहे। सभी जगह लोग जल्दी पास बनवाने की चाह में एक दूसरे से सटकर खड़े रहे और धक्कामुक्की भी करते रहे। उधर, अस्पतालों में थर्मल स्क्रीनिंग व एंटीजन किट से लोगों की जांच की गई। जांच के दौरान जो व्यक्ति निगेटिव निकला, उसकी रिपोर्ट उसे दे दी गई।
अनलॉक सरीखे रहे हालात
मंझनपुर। प्रदेश सरकार ने शुक्रवार रात आठ बजे से मंगलवार सुबह तक के लिए लॉकडाउन घोषित कर रखा है। सरकार की मंशा है कि कोरोना की चेन को तोड़ा जाए। इसके बावजूद गांवों में अपनी हुकूमत स्थापित करने की खातिर शनिवार को पास बनवाने के लिए प्रत्याशी व उनके समर्थक जत्थे में निकले। रास्ते में पुलिस ने उन्हें कहीं रोकना भी मुनासिब नहीं समझा।
एक प्रत्याशी ने कई-कई लोगों को लाइन में खड़ा कराया
मंझनपुर। कोविड जांच के दौरान किसी प्रत्याशी का बनने वाला अभिकर्ता पॉजिटिव नहीं आए, इसके लिए प्रत्याशियों ने कई-कई लोगों को लाइन में खड़ा करवा दिया था। इसकी वजह से अस्पतालों में जांच कराने वालों की लंबी कतारें लगी रहीं। लोगों की मंशा थी कि अगर कोई समर्थक पॉजिटिव भी आ गया तो दूसरे के नाम से पास बनवा लिया जाएगा।
फर्जी रिपोर्ट बनवाने को दे रहे थे मुंहमांगा पैसा
मंझनपुर। कोविड-19 की जांच के लिए लंबी लाइन देख तमाम प्रत्याशियों ने पिछले दरवाजे से भी रिपोर्ट बनवाने का प्रयास किया। बिना जांच के रिपोर्ट मिल जाए, इसके लिए वह लोग एक से दो हजार रुपये तक की रिश्वत भी दे रहे थे। हालांकि, प्रशासन की सख्ती के कारण ज्यादातर स्थानों पर निष्पक्ष तरीके से ही जांच हुई। संवाद