प्रधानों की सोच स्वच्छता मिशन पर भारी पड़ रही है। 11 हजार शौचालय के लिए 14 करोड़ की रकम जारी की गई है। वसूली न होने से ग्राम प्रधान इस रकम का आवंटन लाभार्थियों को नहीं कर रहे हैं। इससे गांवों में शत-प्रतिशत शौचालय का निर्माण नहीं हो पा रहा है। यही कारण है कि 253 ग्राम सभाओं में डंप करोड़ों की रकम बैंकों की शोभा बढ़ा रही है।
दो अक्टूबर 2014 से शासन ने शौचालयों की रकम में इजाफा कर दिया है। दो साल के भीतर शासन ने जिले की साढ़े तीन सौ ग्राम सभाओं में 28 हजार 631 हजार रुपया प्रति शौचालय निर्माण के लिए 34 करोड़, 35 लाख 520 रुपया जारी किया था। इनमें से कुछ ग्राम सभाओं ने धनराशि मिलने के बाद शत प्रतिशत शौचालय का निर्माण करा दिया, लेकिन 253 ग्राम सभाओं में शौचालय का निर्माण नहीं कराया। 13 करोड़, 82 लाख, 60 हजार 924 रुपया ग्राम निधि छह के खाते में डंप है।
ग्राम प्रधानों और पंचायत सचिवों की लापरवाही के चलते 11 हजार 522 शौचालयों का निर्माण अधर में लटका हुआ है। माना जा रहा है कि ब्लॉकों में तैनात एडीओ पंचायत द्वारा प्रधानों और सचिवों के खिलाफ समय-समय पर शिकंजा नहीं कसा गया। इसके चलते धन देने के बाद भी शौचालयों का निर्माण अधर में लटका हुआ है। ऐसे में शासन द्वारा चलाए जा रहे ओडीएफ अभियान जिले में सफल नहीं हो पा रहा है।
लापरवाही के चलते नहीं बन सकी डिजिटल डायरी
शौचालय निर्माण को समय पर पूरा कराने में ग्राम प्रधानों और सचिवाें द्वारा जमकर मनमानी की जा रही है। डीएम और डीपीआरओ द्वारा ओडीएफ अभियान को जितना तेज किया जा रहा है, मातहत उतना ही शिथिलता बरत रहे हैं। इसी के चलते ग्राम सभाओं में धनराशि भेजने के बाद भी शौचालय निर्माण का काम समय पर पूरा नहीं हो पा रहा है। निर्माण पूरा न होने से डीपीआरओ शौचालयों की डिजिटल डायरी भी नहीं तैयार कर पा रहें हैं।