उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के गृह नगर सिराथू नगर पंचायत में खेल का मैदान नहीं होने से प्रतियोगी छात्रों और खिलाड़ियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं बुजुर्गों को सुबह-शाम टहलने के लिए भी कोई स्थान नहीं है।
सिराथू कस्बे की करीब 25 हजार की आबादी में अस्पताल, स्कूल और कॉलेज तो हैं लेकिन खेलकूद और अभ्यास के लिए मैदान नहीं है। युवाओं का कहना है कि खेल का मैदान बनाने को लेकर कई बार नगर पंचायत से मांग की गई, लेकिन व्यवस्था नहीं हो सकी।
स्थानीय खिलाड़ी अंकित यादव ने बताया कि हम लोग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के साथ-साथ शारीरिक अभ्यास के लिए जगह ढूंढते हैं। मगर नगर में मैदान नहीं होने के कारण मजबूरी में निजी जिम सेंटरों का सहारा लेना पड़ता है। यहां हर महीने अच्छी-खासी फीस देनी पड़ती है जिससे गरीब घरों के छात्र पीछे रह जाते हैं।
इसी तरह कस्बावासी रामशंकर त्रिपाठी ने बताया कि नगर पंचायत क्षेत्र में करीब 10 बीघे से अधिक भूमि खाली पड़ी है। इसके बावजूद खेल के लिए जमीन चिह्नित नहीं की गई है। अगर प्रशासन चाहे तो इसी भूमि पर युवाओं के लिए बेहतर खेल मैदान विकसित किया जा सकता है।
बच्चों और युवाओं का भविष्य मैदान पर ही बनता है लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही से प्रतिभाएं भटक रही हैं। कस्बे के मोती, रोशन व गुलाब का कहना है कि खेल का मैदान बन जाने से न केवल युवाओं को अभ्यास की सुविधा मिलेगी, बल्कि नगर का नाम भी खेलों में रोशन होगा। फिलहाल, खिलाड़ी और प्रतियोगी छात्र मैदान के इंतजार में हैं। नगर पंचायत अध्यक्ष भोला यादव ने बताया कि बताया कि फिलहाल अभी कोई खेल का मैदान नहीं है। बोर्ड की बैठक में इसका प्रस्ताव रखा जाएगा।
कस्बे में खेल की कोई सुविधा नहीं है। किसी को खेलना है तो स्कूल के मैदान और सड़क की पटरी ही सहारा है। कस्बे की आबादी बढ़ने के कारण अब पटरी पर खेलना भी सहीं नहीं है। - किशन पांडेय, खिलाड़ी
खेल में रुचि रखने वालों के लिए व्यवस्था नहीं है। यहां निजी जिम हैं जहां कसरत की जा सकती है। इसके लिए फीस देना पड़ता है। - अतुल कुमार, सिराथू
किशन पांडेय, खिलाड़ी