मंझनपुर। दुश्मन बने नीलगायों के उत्पात से आजिज किसानों ने सोमवार को कलेक्ट्रेट का घेराव किया। सईगंज और असवा के किसानों ने डीएम को प्रार्थनापत्र देकर इनसे बर्बाद हो रही खेती को बचाने की गुहार लगाई। आरोप है कि कई बार एसडीएम, वन विभाग के अफसरों को प्रार्थनापत्र दिया गया। फिर भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। इससे किसानों की फसल चौपट हो रही है। उन्हें निवाले का इंतजाम करना मुश्किल है।
बता दें कि कौशाम्बी के गंगा-यमुना तराई इलाके की खेती नीलगायों के उत्पात की भेंट चढ़ती जा रही है। नीलगायों के उत्पात से चौपट हो रही फसलों को बचाने के लिए सोमवार को सईगंज और असवा गांव के किसानों ने कलेक्ट्रेट में डीएम से मिलकर गुहार लगाई। साथ ही सांसद विनोद सोनकर को भी प्रार्थनापत्र देकर नीलगायों के उत्पात से निजात दिलवाने की मांग की है। सईगंज गांव के रहने वाले किसान देशराज पाल, मंगल भारती, छत्रपाल, लवकुमार, समयलाल, उधव प्रसाद चौरसिया, श्यामलाल आदि ने बताया कि लगातार नीलगायों की संख्या बढ़ती जा रही है।
इससे किसानों को फसलों की रखवाली के लिए कड़ाके की इस ठंड में खेत के समीप झोपड़ी बनाकर रात में रहने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है। वहीं झुंड में रहने वाले नीलगाय रखवाली में जरा सी चूक होने पर ही एक रात में खेत की सारी फसल चरने के साथ रौंदकर बर्बाद कर देते हैं। किसानों के मुताबिक नीलगायों का उत्पात पिछले कुछ सालों से इतना बढ़ गया है कि मटर, मसूर, अरहर, आलू, गोभी, टमाटर, बैंगन आदि की खेती से तमाम किसानों ने तौबा करनी शुरू कर दी है। किसानों का कहना है कि कई बार एसडीएम, वन विभाग के अधिकारियों को प्रार्थनापत्र दिया गया। इसके बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।