तालाब लबालब हैं, लेकिन नहरें सूखी हैं। यमुना की तराई इलाके की मूर्तियां नहरों में विसर्जित कराने की सारी कवायद पर नहर विभाग पानी फेरने पर आमादा है। अधिकारियों के निर्देश के बाद भी कैनाल से नहर में पानी नहीं छोड़ा गया है। ऐन वक्त पर पंप कैनाल के जिम्मेदारों ने बिजली विभाग पर इसका ठीकरा फोड़ कर अपना पल्ला झाड़ लिया है। दो विभागों के चक्कर में यमुना तराई के लगभग 24 गांव के लोग असमंजस में हैं कि वह मूर्तियों को यमुना में विसर्जित करें अथवा सूखी नहर में।
किशुनपुर पंप कैनाल से करीब एक पखवारे से पानी नहीं छोड़ा गया है। अभी तक बारिश का पानी भरा था, लेकिन इस बीच पानी न छोड़े जाने से नहर सूख गई है। कहीं-कहीं पानी है, जबकि बीच में नहर सूखी भी है। यमुना तराई किनारे बसे लौगांवा, डकशरीरा, कोरीपुर, अलवारा, भारतपुर, पश्चिमशरीरा, पूरबशरीरा, अधांवा, गढ़ी, चांदेराई, धवाड़ा, गोराजू, अजरौली, निखोदा, मकनपुर, सरसवां, शिवरा समेत आदि गांवों के दुर्गा पंडाल आयोजकों के सामने विसर्जन की सबसे बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। आयोजकों का कहना है कि प्रशासन की सख्त हिदायत है कि वह नदियों में मूर्तियों का विसर्जन नहीं करेंगे।
उनके यहां पूरबशरीरा, पश्चिमशरीरा और शिवरा गांव के सामने से गुजरने वाली किशुनपुर पंप कैनाल की नहर में ही मूर्ति का विर्सजन होता था लेकिन अबकी यह नहर सूख चुकी है। ऐसे में वह मूर्ति का विसर्जन कैसे करेंगे। इस संबंध में अधिकारियों ने हफ्ते भर पहले नहर विभाग के अधिकारियों से बैठक भी की थी। ऐन वक्त पर नहर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पंप कैनाल का विद्युत आपूर्ति प्रभावित है। केबिल जलने की वजह से पंप नहीं चल पा रहे हैं। यदि बिजली विभाग मदद करे तो वह पानी छोड़ने के लिए तैयार हैं। दो विभागों की खींचतान में दुर्गा पंडाल के आयोजक परेशान हैं।
नया पुरवा में होगा विसर्जन
ओसा चौराहा व गांव में स्थापित छह दुर्गा पंडाल स्थापित हैं। इनके अलावा यहां मंझनपुर कस्बे की भी मूर्तियां स्थापित होंगी। दुर्गा पंडाल कमेटी के विमलेश्वरी और मैकू राजपूत ने बताया कि वह मंगलवार दोपहर नया पुरवा में स्थित तालाब में मूर्तियों का विसर्जन करेंगे।