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Kaushambi News: थाईलैंड के बौद्घ अनुयायियों ने तथागत की तपस्थली में डाला डेरा

Mon, 16 Jan 2023 01:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
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कोरोना महामारी के कारण तीन साल बाद धार्मिक यात्रा पर भारत आए विदेशी मेहमान
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संवाद न्यूज एजेंसी
बारा। तथागत की तपस्थली पर थाईलैंड से आकर बौद्ध धर्म के अनुयायियों ने डेरा डाल दिया है। कोराना की वजह से तीन साल बाद ये विदेशी मेहमान धार्मिक यात्रा पर भारत आए। भगवान बौद्ध की तपोस्थली पहुंच कर उपासना की। यहां की माटी को अपने माथे पर लगाया। श्रद्धालुओं का दल यहां दो दिन ठहरेगा।
भगवान बौद्ध की तपोस्थली पर हर साल थाईलैंड से अनुयायी आते थे। वर्ष 2019 में कोरोना महामारी फैलने के बाद तीन साल यह नहीं आ सके। अबकी साल फिर इनका आगमन हुआ है। धार्मिक यात्रा पर थाईलैंड से निकले बौद्घ धर्म के 90 अनुयायी 11 दिसंबर को कोलकाता एयरपोर्ट पर उतरे। वहां से पैदल चलते हुए बिहार के बौद्ध गया पहुंचे। वहां एक सप्ताह रुक कर दर्शन किया। फिर वहां से यह दल वाराणसी के सारनाथ पहुंचा। यहां पर भी काफी दिनों तक रुके रहे और भगवान बुद्ध की आराधना की। एक सप्ताह पहले सारनाथ से प्रयागराज के लिए पैदल निकले। शुक्रवार को प्रयागराज पहुंचे। रविवार की भोर वहां से कौशाम्बी के लिए रवाना हुए। सुबह लगभग 10 बजे बौद्घ धर्म के अनुयायियों का दल तथागत की तपस्थली आ गया। यहां सबसे पहले बने धम्म मित्र बुद्ध विहार गए।
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धम्म मित्र बुद्घ विहार में कुछ देर रुकने के बाद पास में ही बने बौद्ध स्थल पहुंचे। बौद्ध स्थल की मिट्टी को अपने माथे पर लगा कर उपासना की। इस धार्मिक यात्रा की खुशी बौद्घ धर्म के अनुयायियों के चेहरे पर साफ झलक रही थी। थाईलैंड से आए बौद्घ धर्म के अनुयायियों के अगुवा परापवट सौंग सैंग ने बताया कि यह दल पिछले सात सालों से आ रहा है। 2019 में भी यहां दर्शन के लिए आए थे। यात्रा पूरी होने के बाद वापसी के समय सारनाथ में कोविड की वजह से फंस गए थे। कई महीने के बाद थाईलैंड के लिए रवाना हो सके थे। तीन साल के बाद फिर से भारत में धार्मिक यात्रा पर आए हैं। उनके दल में परापवट देवछा, परापवट सुफलक सहित 90 लोग शामिल हैं। उन्होंने बताया कि सोमवार को वह लोग संकिसा फरुखाबाद के लिए कूच करेंगे। वहां से श्रावस्ती में दर्शन के बाद अपने देश रवाना हो जाएंगे।
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बौद्ध धर्म में भी दो संप्रदाय होते हैं। इनमें एक महायान है तो दूसरा हीनयान। हीनयान के अनुयायी मूर्ति पूजा नहीं करते। इनकी यात्रा पैदल नहीं होती। यह अनुयायी सफेद वस्त्र पहनते हैं। खुले आसमान के नीच नहीं सोते। जबकि महायान के अनुयायी मूर्ति पूजा पर विश्वास रखते हैं। खाली मैदानों में तंबू डाल कर निवास करते हैं। धार्मिक यात्रा पर कौशाम्बी आया दल भी महायान संप्रदाय से जुड़ा है।
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