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नोटबंदी की मार, मदद की दरकार

Mon, 28 Nov 2016 12:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
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नोट बंदी की मार से सब बेहाल हो गए हैं। अब वह भी हलाकान हो गए हैं, जो अभी तक काम चलाते रहे। शनिवार व रविवार को बैंक बंद था। एटीएम से रुपया नहीं मिल रहा है। इससे लोगों की मुश्किलें और बढ़ी। घर-घर नकदी का संकट बरकरार है।
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   मंझनपुर के सुशील केशरवानी ठेकेदार हैं। नोट बंदी की मार से वह अब तक निपटते आए हैं, लेकिन अब वह भी रुपये के लिए परेशान हो गए हैं। बैंक से रुपया निकालने की सीमा तय है। इस पर सितम यह कि बैंक में कैश नहीं था, इसलिए बंदी के पहले वह रुपया नहीं निकाल सके। सुशील का कहना है कि किसी तरह उन्होंने अपना काम अब तक चलाया, लेकिन समस्या बढ़ गई है। कहा कि जिला मुख्यालय के किसी भी एटीएम से कैश नहीं निकल रहा है।

अब बताएं इसके अलावा कौन सा रास्ता है। सिराथू के अमित केशरवानी का कहना है कि वह व्यापारी हैं। कारोबार करते हैं। सामान उठाने के लिए चेक से भी सामग्री नहीं मिल रही है। यही एक आखिरी विकल्प भी था, लेकिन वह भी उनके काम नहीं आ रहा है। यही हाल तमाम कारोबारियों का है। अब तो घर-घर नकदी का संकट बन गया है। जिनके पास जो भी रुपये थे, या उन्होंने निकाले थे वह भी खत्म हो गए हैं। सहालग का सीजन चल रहा है। आदमी के हाथ खाली हैं। गांव के मजदूर व किसान की स्थिति बदतर है। एक दूसरे की मदद के भरोसे अभी तक लोगों ने 16 दिन काटे, लेकिन अब मदद भी नहीं मिल रही है। इसकी बड़ी वजह यह कि मदद देने वाला भी हलाकान है।
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