छुट्टी के दिनों में प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में न मध्याह्न भोजन बना है और न बनेगा। स्कूल में बच्चे नहीं आते इसकी रिपोर्ट एबीएसए के माध्यम से हम लोगों ने डीएम को भेजवा दिया है। रही बात स्कूल खुलने की तो वहां पर रसोइयां पहुंच रही हैं। यह बाते एक विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने कही।
बीआरसी कौशाम्बी के प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में तैनात प्रधानाध्यापक पूरी तरह से निरंकुश हैं। उन पर विभागीय जिम्मेदारों का जोर नहीं है इसकी बानगी बुधवार को देखने को मिली। पूर्व माध्यमिक विद्यालय गढ़वा में तैनात प्रधानाध्यापक दशरथ लाल गुप्ता को स्कूल जाने की फुरसत नहीं है। स्कूल के समय वह एक दुकान में खरीददारी कर रहे थे। जब उनसे मध्याह्न भोजन बनवाने के बावत जानकारी चाही गई तो उनका जवाब ऐसा था कि कोई भी अचंभित हो जाता।
उनका कहना था कि छुट्टी के दिनों में मध्याह्न भोजन न तो बना है और न बनेगा। शिक्षकों ने एबीएसए के माध्यम से यह रिपोर्ट डीएम को भेजवा दिया है कि बच्चे स्कूल आते ही नहीं है। रसोइयां स्कूल जाती हैं पर बच्चों के न रहने के कारण भोजन नहीं बनता। जबकि हकीकत यह है कि रसोइयों को भोजन बनाने के लिए चुटकी भर आटा तक उपलब्ध नहीं कराया गया है।
बीआरसी कौशाम्बी के पूर्व माध्यमिक विद्यालय गढ़वा में सुमित्रा और लालती देवी नाम की दो रसोइयों की तैनाती है। बुधवार को दोनों रसोइयां स्कूल का ताला खोलकर बैठीं थी। जब उनसे मध्याह्न भोजन के बावत पूछा गया तो उनका कहना था कि भोजन बनाने के लिए कुछ है ही नहीं। उन्हें तो स्कूल खोलकर बैठने का निर्देश है। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि शासन के आदेश पर गर्मी की छुट्टी में बच्चों को परोसे जाने वाले मध्याह्न भोजन को लेकर मातहत कितने संजीदा हैं।
बीआरसी कौशाम्बी के सभी विद्यालयों में भोजन नहीं बनता यह बात गलत है। ऐसा यदि किसी अध्यापक ने बोला है तो गैर जिम्मेदाराना बात है। मामले की जांच कराकर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।