दोआबा प्रदेश में पूर्ण ओडीएफ वाला पहला जिला होना चाहिए था लेकिन यह स्थान किसी दूसरे जिले ने हासिल कर लिया। अब कम से कम इतनी मेहनत की जाए कि दूसरा स्थान तो मिल सके। यह बातें डीएम ने निगरानी समिति की बैठक में ग्रुप लीडरों व संबंधित अधिकारियों से कहीं।
डीएम अखंड प्रताप सिंह बुधवार को कलक्ट्रेट स्थित सम्राट उदयन सभागार में ओडीएफ निगरानी समिति की बैठक ली। बैठक में उन्होंने कहा कि शुरुआत में ओडीएफ टीम लीडरों ने अच्छा काम किया था लेकिन अब शिथिलता बरती जा रही है। पूरे मनोयोग से यदि टीम लीडरों ने काम किया होता तो आज दोआबा प्रदेश का पहला ओडीएफ जिला होता लेकिन शिथिलता के चलते यह स्थान मिर्जापुर ने हासिल कर लिया। ऐसे में अब ओडीएफ टीम के लोगों को चाहिए कि वह कम से कम दूसरा स्थान जिले को दिलाने का काम करें।
उन्होंने कहा कि जिले के 151 गांव ऐसे हैं जिसकी आबादी 11 से 12 सौ की है जबकि 165 गांव ऐसे हैं जिनकी आबादी दो से तीन हजार के आस-पास है। यदि साढ़े तीन सौ गांवों को ओडीएफ करा लिया जाए तो जिला प्रदेश में पहले स्थान पर पहुंच जाएगा। इसके लिए उन्होंने टीम लीडरों में जोश भरते हुए कहा कि पूरी तन्मयता से गांवों को ओडीएफ बनाने में लग जाएं और जहां परेशानी हो बताएं हर मदद की जाएगी। बैठक में डीपीआरओ राजेंद्र प्रसाद मिश्र, बीडीओ सिराथू अभिलाष त्रिपाठी, जिला समन्वयक पंचायतराज सुजीत कुमार शुक्ल, बीडीओ नेवादा दुर्योधन समेत निगरानी समिति के सभी सदस्य मौजूद रहे।