रामलीला भी आधुनिक हो गई है। मंझनपुर की रामलीला कभी मशाल की रोशनी में होती थी। अब रामलीला डीजे लाइट, पार लाइट आदि के मिश्रण से होती है। इस लाइट का इस्तेमाल पात्रों के किरदार के हिसाब से होता है, ताकि दर्शकों की उत्सुकता बनी रहे।
मंझनपुर नगर पंचायत में करीब 78 साल पहले रामलीला की शुरूआत हुई थी। तब से यहां अनवरत रामलीला हो रही है। गल्ला मंडी में इस रामलीला के मंचन के लिए मंच बना हुआ है। दर्शकों के लिए भी पर्याप्त जगह है। दर्शकों के मिजाज के हिसाब से यहां की रामलील को नया लुक देने की कमेटी ने भरसक प्रयास किया है। सोने व चांदी के जड़ित कपड़े राम व लक्ष्मण पहनते हैं। ये वस्त्र रामलीला मंचन के विशेष मौके पर पहने जाते हैं।
पांच साल पहले इस रामलीला की कमान परमेश केशरवानी उर्फ गुड्डा ने संभाली। जिम्मेदारी लेते ही इस रामलीला को नया स्वरूप देने की कोशिश की गई। मंझनपुर की रामलीला में अब मेगा लाइट, पार लाइट, रंगीन हाईलोजन के अलावा आधुनिक वाद्य यंत्रों का इस्तेमाल होता है। रामायण पाठ के दौरान हारमोनियम, ढोल का प्रयोग नियमित है। इसके बाद मंचन के दौरान लाइट व आधुनिक यंत्रों का भरपूर प्रयोग किया जाता है ताकि दर्शकों का आकर्षण बना रहे।
रामलीला में आएंगे चिह्नित कलाकार
मंझनपुर की रामलीला में पहली किसी एक कमेटी को बुलाने के बजाय अध्यक्ष ने खुद जाकर पात्रों का चयन किया है। अबकी रामलीला के लिए हमीरपुर, जालौन, कानपुर और फतेहपुर के कलाकारों को उन्होंने बुलाया। पात्रों का चयन खुद कमेटी ने किया है।