दोआबा में गंगा एक्शन प्लान के तहत शौचालयों का आवंटन और निर्माण मानक को ताक पर रखकर किया गया। वसूली के चक्कर में ग्राम प्रधानों ने अपात्र लोगों का चयन किया। इसके बाद निर्माण भी मानक को ताक पर रखकर कराया गया। इसका नतीजा रहा कि गंगा एक्शन प्लान के तहत बने एक भी शौचालय मानक को पूरा नहीं कर रहे हैं। उधर, जिम्मेदार हैं कि मानक को दरकिनार कर बनवाए गए शौचालयों को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं।
दो अक्टूबर 2014 के बाद दोआबा में गंगा की तराई में बसे 33 गांवों का चयन गंगा एक्शन प्लान के तहत किया गया। इसमें विकास खंड कड़ा, सिराथू और मूरतगंज की 33 ग्राम सभाएं शामिल हैं। गंगा को स्वच्छ बनाए रखने के लिए इन गांवों को एक ही किस्त में 10 हजार 163 शौचालयों की रकम जारी कर दी। शौचालयों की रकम ग्राम सभाओं में पहुंचते ही बंदरबांट शुरू हो गई। तत्कालीन ग्राम प्रधानों ने तोहफे के रूप में मिली शौचालय की रकम में जमकर बंदरबांट किया। पात्रता को दरकिनार कर मनमाफिक लाभार्थियों का चयन करते हुए प्रति लाभार्थी एक से दो हजार रुपये वसूल किए गए। इसके बाद शौचालयों का निर्माण मानक को दरकिनार करते हुए करवा दिया।
बानगी के तौर पर विकास खंड कड़ा के लेहदरी गांव को लिया जा सकता है। यहां पर गंगा एक्शन प्लान के तहत 242 शौचालयों की रकम भेजी गई थी। इनमें से ग्राम प्रधान ने अब तक महज 210 शौचालयों का निर्माण कराया है। खास बात यह है कि एक भी शौचालय के निर्माण में मानक का ध्यान नहीं रखा गया। गांव में बने किसी भी शौचालय में दो गड्ढे नहीं हैं। यही हाल पड़ोसी गांव स्वातखत कड़ा, अलीपुर जीता आदि ग्राम सभाओं का है। इतना ही नहीं पात्रता चयन में भी भारी धांधली इन गांवों में है। मामले में सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान के जिम्मेदार पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए हैं। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि गंगा एक्शन प्लान के तहत खर्च की करोड़ों की रकम से प्लान को कितनी सफलता मिलेगी।
दो गड्ढे बनवाने का है मानक
दो अक्टूबर 2014 के बाद शौचालय निर्माण की रकम शासन ने 12 हजार कर दी है। रकम में बढ़ोत्तरी के साथ-साथ शौचालय निर्माण का मानक भी तय कर दिया गया है। मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन द्वारा 6 फरवरी 2015 में भेजे गए शासनादेश पर जाएं तो शौचालय निर्माण में दीवार, छत हर हाल में होनी चाहिए। इसके अलावा शौचालय में हाथ धोने के लिए पानी की व्यवस्था रहनी चाहिए। प्रत्येक शौचालय में दो गड्ढे या सैप्टिक टैंक या बायो टॉयलेट जैसी सुरक्षित स्वच्छता व्यवस्था होनी चाहिए लेकिन दोआबा में शासनादेश के मुताबिक एक भी शौचालय का न बनना मामले में जिम्मेदारों की भूमिका को भी संदिग्ध कर रहा है।
दो साल में भी नहीं हो सका 32 शौचालयों का निर्माण
विकास खंड कड़ा के लेहदरी गांव में अक्टूबर 2014 में 242 शौचालयों की रकम भेजी गई थी। इनमें से 210 का निर्माण तो ग्राम प्रधान ने मानक को ताक पर रखते हुए करा दिया पर 32 आज भी अधर में लटके हुए हैं। इन शौचालयों के लाभार्थी कौन हैं और निर्माण क्यों नहीं कराया गया इस बावत जब ग्राम प्रधान वीरेंद्र कुमार से पूछा गया तो उन्होंने चुनावी व्यस्तता की बात कहकर फोन बंद कर लिया। इससे साफ है कि 32 शौचालयों की रकम में कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ी जरूर है।
शौचालय निर्माण में दो गड्ढे बनवाने का निर्देश शासन ने दे रखा है। एक गड्ढे वाले शौचालय शासनादेश के खिलाफ हैं। मामले की जांच कराई जाएगी। यदि शौचालय एक गड्ढे के बने तो संबंधित ग्राम प्रधान और सचिव के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सुजीत कुमार शुक्ल, जिला कोआर्डिनेटर
सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान