मंझनपुर/कनैली। गंगा-जमुना की तराई में होने वाला सफेद कद्दू जिले की पहचान बन गया है। न केवल आसपास के जनपदों बल्कि पेठे के लिए मशहूर आगरा के बाजार में भी इसने अपनी धमक है। यही कारण है कि जनपद में होने वाली करीब 70 फीसदी पैदावार की आपूर्ति सिर्फ आगरा में होती है। करीब ढाई दशक पहले इसकी खेती शुरू हुई थी। कम लागत और मेहनत में अधिक मुनाफा और बढ़ती मांग को देखकर अन्य किसानों का भी रुझान बढ़ा। करीब 350 हेक्टेयर में लगभग 575 किसान इसकी खेती से जुड़ गए हैं।
सफेद कद्दू का सबसे ज्यादा इस्तेमाल पेठा बनाने में किया जाता है। इसके अलावा सब्जी में डालने वाली बड़ी भी इसी से बनाई जाती है। जमुना नदी के तट पर बसे नेवादा ब्लॉक के कटैया, मल्हीपुर समेत अन्य गांवों में इसकी खेती शुरू हुई थी। सब्जियों की अन्य खेती की अपेक्षा इसमें लागत और मेहनत दोनों ही काफी कम लगती थी, जबकि फायदा ज्यादा था। सफेद कद्दू की खेती ने किसानों की किस्मत चमका दी। परिणामस्वरूप अन्य किसानों का भी इसकी तरफ रुझान बढ़ा। जमुना के साथ ही गंगा किनारे भी बड़े पैमाने पर इसकी खेती होने लगी। अब तो मैदानी इलाकों के किसानों ने परंपरागत फसलों के साथ इसे भी अपना लिया है। नेवादा, कौशाम्बी, कड़ा, मूतरगंज, चायल समेत लगभग हर ब्लॉक में इसकी खेती हो रही है।
नेपाल में दोआबा के कद्दू की है मांग
सबसे खास बात यह है कि कद्दू की बिक्री के लिए किसानों को कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ती। दूरदराज से व्यापारी खुद आते हैं और खेतों से ही पैदावार को खरीद लेते हैं। आगरा के अलावा उत्तर प्रदेश के कानपुर, प्रयागराज में यहां के सफेद कद्दू की अच्छी मांग है। मध्य प्रदेश के सतना, जबलपुर और बिहार प्रांत में भी आपूर्ति होती है। यही नहीं पड़ोसी देश नेपाल में भी कौशाम्बी का कद्दू भेजा जाता है।
सफेद कद्दू औषधीय गुणों से भी भरपूर है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके जूस में पोटैशियम, कैल्शियम, विटामिन जैसे कई तरह के मिनरल होते हैं। इसके जूस का सेवन हृदय और लीवर के रोगियों की सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है। इसके अलावा शुगर के रोगी भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।- डॉ.अखिलेश सिंह, सीएमएस, राजकीय मॉडल आयुर्वेदिक अस्पताल सिराथू
सफेद कद्दू की खेती किसानों के लिए काफी फायदेमंद है। मवेशियों से भी इसे कोई खास खतरा नहीं रहता। किसानों में इसकी खेती को लेकर रुझान बढ़ा है। करीब 350 हेक्टेयर में 575 किसान सफेद कद्दू की खेती कर रहे हैं।- सुरेंद्र राम भास्कर, जिला उद्यान अधिकारी