बुद्धम शरणम् गच्छामि...इस सूत्रवाक्य के साथ पर्यावरण बचाने का संदेश देने साइकिल लेकर काठमांडू से दिल्ली की यात्रा पर निकला बौद्ध भिक्षुणियों का दल रविवार को शाक्यमुनि की तपोस्थली कौशाम्बी पहुंचा। इस दौरान भिक्षुणियों ने महिला सशक्तिकरण के भी नारे को बुलंद किया। लोगों से देश को प्रदूषण के बढ़ते खतरे की जानकारी देते हुए सजग होने की अपील की।
पर्यावरण के बढ़ते खतरे से जनता को जागरूक बनाने के उद्देश्य से द्रुपा कुंग फू नन यानि बौद्ध भिक्षुणिओं का एक दल इन दिनों काठमांडू से दिल्ली की साइकिल यात्रा पर है। 19 नवंबर को काठमांडू से दिल्ली के लिए निकली 250 बौद्ध भिक्षुणियों की यह टोली गोरखपुर, पटना, राजगीर, गया, सारनाथ, वाराणसी, इलाहाबाद होते हुए रविवार को भगवान बुद्ध की तपोस्थली कौशाम्बी पहुंची। रिगजिंग नांग्याल और ग्यालवंग की अगुवाई में अपराह्न 3 बजे कौशाम्बी पहुंचने पर इन साइकिल यात्रियों का कौशाम्बी में सांसद विनोद सोनकर ने स्वागत किया। यहां पहुंचने पर भिक्षुणियों ने सबसे पहले बुद्ध की तपोस्थली में माथा टेका। फिर अशोक स्तम्भ को देखा, उसकी परिक्रमा की।
टोली की अगुवाई कर रही भिक्षुणी ग्यालवंग ने बताया कि काठमांडू से दिल्ली की 2200 किलोमीटर की यह साइकिल यात्रा महिला सशक्तिकरण का उदाहरण है। वहीं उनकी इस यात्रा का मकसद जन-जन को बढ़ते प्रदूषण और खराब होते पर्यावरण के खतरे की जानकारी देकर उन्हें जागरूक बनाना है। बौद्ध भिक्षुणी ने कहा कि उनका सभी लोगों को यही संदेश है कि दिन-ब-दिन बढ़ती वाहनों की संख्या और उनसे निकलने वाला धुआं वातावरण को जहरीला बना रहा है। इससे रोजाना नई-नई बीमारियां पैदा हो रही हैं। ऐसे में लोगों के जागरूक बनने से ही पर्यावरण सुधरेगा।
उन्होंने लोगों का आह्वान किया कि कम दूरी का सफर करने के लिए वे साइकिल का सहारा ले। दफ्तर, बाजार के काम साइकिल से निपटाए जा सकते हैं। इस मौके पर भाजपा नेता अभिषेक तिवारी, लाल बहादुर, दिनेश पांडेय, पुष्पेंद्र चौधरी, राजेंद्र प्रसाद पांडेय, फूलचंद्र, अंतूराम सोनकर आदि मौजूद रहे।