मंझनपुर। मौसम के बिगड़े मिजाज ने दोआबा के बालू माफियाओं की धड़कनें बढ़ा दी हैं। उम्मीद से पहले शुरू हुई बारिश को लेकर बालू के धंधेबाज परेशान हैं। उन्हें अब अवैध खनन के अलावा बाकी कोई बात समझ नहीं आ रही है। धंधेबाजों ने अवैध तरीके से खनन करने में एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है। बरसात के चलते रास्ता बंद हो इससे पहले अधिक से अधिक बालू निकालने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। प्रभारी डीएम का कहना है कि चुटकी भर भी अवैध बालू मिली तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
बतादें कि जिले में बालू खनन के लिए यमुना नदी के 12 भूखंडों का आवंटन हुआ है। पांच भूखंड एनओसी नहीं होने के कारण बंद चल रहे हैं। सिर्फ 7 भूखंडों पर ही खनन कार्य चल रहा है। इनकी आड़ में बालू माफिया अगल-बगल के गैर आवंटित भूखंडों से भी अवैध बालू खनन कराते थे। चर्चा है कि इसमें होने वाली आय का एक हिस्सा अफसरों तक भी पहुंचता था। इधर 15 दिन पहले फतेहपुर एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने आए मुख्यमंत्री का पारा गरम हुआ और इलाहाबाद के अधिकारियों पर कार्रवाई कर दी। इसके बाद कौशाम्बी के अफसरों ने अवैध खनन बंद कराने की कोशिश शुरू कर दी। इसे लेकर अफसरों-माफियाओं के बीच खासी तल्खी देखने को मिल रही थी। हालांकि माफिया चोरी छिपे अवैध खनन कराने से बाज नहीं आ रहे थे।
उन्हें पूरी उम्मीद थी कि 20 जून के बाद ही बारिश शुरू होगी। तब तक काफी हद तक काम निपट जाएगा। शुक्रवार शाम के बाद जिले में शनिवार को भी बरसात हुई और मौसम का मिजाज बदला तो माफियाओं की नींद उड़ गई। उन्हें इस बात का डर सताने लगा है कि कहीं तेज बारिश लगातार होने से रास्ता बंद हो गया तो भारी नुकसान होगा। इसे लेकर परेशान धंधेबाजों ने अवैध खनन में पूरी ताकत झोंक दी है। उनका पूरा प्रयास है कि जल्दी से जल्दी ज्यादा से ज्यादा बालू निकाल ली जाए। उधर, अधिकारी अवैध खनन नहीं होने देने की जिद पर अड़े हैं। इस मामले में प्रभारी डीएम सुरेन्द्र कुमार से बात की गई तो उनका कहना था कि सभी अफसरों को घाटों पर नजर रखने का निर्देश दे दिया गया है। किसी भी कीमत पर अवैध खनन नहीं होने दिया जाएगा। बताया कि जरा भी अवैध बालू निकली तो पट्टाधारक से लेकर जिम्मेदार अफसर तक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
और माझी भी अब मैदान में
मंझनपुर (ब्यूरो)। बारिश के बाद माझी भी अब पूरी तरह से अवैध खनन के मैदान में आ गए हैं। बताया जा रहा है कि आखिरी समय में अवैध बालू से मुनाफा कमाने को लेकर माझियों में होड़ लगी है। गैरआवंटित घाटों से माझी खुलेआम खनन कर रहे हैं। आसपास के पट्टाधारक उनका विरोध करने की हिम्मत इसलिए नहीं जुटा पा रहे हैं कि आपस में रार हुई तो खेल बिगड़ जाएगा।