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नये साल में पड़ रहा केवल एक गुरु पुष्य योग

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नए साल 2022 में सिर्फ एक बार गुरु पुष्य योग का विशेष संयोग बन रहा है, जबकि वर्ष 2021 में पांच बृहस्पतिवार को पुष्य नक्षत्र पड़ चुका है। ज्योतिषविदों के अनुसार गुरु पुष्य का योग समस्त कार्यों के लिए अति शुभ होता है। इस योग को श्रेष्ठ माना गया है। इस दिन लक्ष्मी व ज्ञान प्राप्ति के लिए साधक श्रीयंत्र का पूजन और मंत्र की सिद्धि करते हैं। इस बार साधकों को यह अवसर पूरे वर्ष पर में सिर्फ एक बार ही मिल सकेगा।
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गुरु पुष्य योग वाले दिन साधक लक्ष्मी प्राप्ति के लिए श्री यंत्र का पूजन कर श्रीविद्या मंत्र की सिद्धि करते हैं, पर इस मंत्र की साधना के लिए किसी योग्य गुरु की आवश्यकता होती है। इसी दिन ज्ञान प्राप्ति के लिए सारस्वत मंत्र का जाप करके सिद्धि प्राप्त की जाती है। सनातन धर्म एवं ज्योतिष शास्त्र में पुष्य नक्षत्र का विशेष महत्व है। 27 नक्षत्रों में यह आठवां नक्षत्र है। इस नक्षत्र में विवाह नहीं होते है, लेकिन सोना चांदी सहित अन्य सभी वस्तुओं की खरीदारी और अन्य शुभ कार्य करना श्रेष्ठ होता है। ज्योतिषाचार्य रामसियासन शास्त्री के अनुसार वर्ष 2022 में जनवरी से लेकर दिसंबर तक के मध्य सिर्फ एक दिन (25 अगस्त) बृहस्पतिवार को पुष्य नक्षत्र का संयोग रहेगा। जबकि, रवि पुष्य योग 13 मार्च, 10 अप्रैल, 8 मई तथा 11 दिसंबर को रहेगा। यह नक्षत्र व्यापारिक और धार्मिक कार्यों के लिए बेहद पवित्र माना जाता है।
ज्योतिषाचार्य रामसियास शास्त्री के मुतातिबक ऋग्वेद में पुष्य नक्षत्र को तिष्य कहा गया है, यानि शुभ या मांगलिक। जो सुख संपदा देने वाला है। पणिनी संहिता में भी इस नक्षत्र को बहुत शुभ कहा गया है। वहीं, शुक्रवार को पुष्य नक्षत्र का प्रभाव शुभ नहीं रहता है। इसके अलावा इस नक्षत्र में विवाह नहीं किया जाता है।
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