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जिला अस्पताल में इलाज कराना है तो घर से पानी लेकर आएं

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कुड इस हाल में है जिला अस्पताल की इमरजेंसी वार्ड के बाहर लगा वॉटर कूलर। संवाद - फोटो : KAUSHAMBI
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जिजिला अस्पताल में इलाज कराने जा रहे हैं तो घर से पानी की बोतल लेकर जाएं। अस्पताल में मरीजों को शुद्ध व डंडा पानी उपलब्ध कराने के लिए लगाए गए सात में से पांच वॉटर प्लांट खराब पड़े हैं। अस्पताल में जो दो वॉटर प्लांट संचालित भी है वह भी गर्म पानी दे रहे हैं। ऐसे हालात में अस्पताल में इलाज कराने वाले मरीज व तीमारदारों को बाहर से बोतल बंद 20 रुपये का पानी खरीदना पड़ रहा है।
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जिले की करीब 20 लाख की आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए शासन ने मंझनपुर में सौ बेड का जिला अस्पताल बनाया है। इसी परिसर में सौ बेड का महिला अस्पताल भी बनाया गया है। दोनों अस्पतालों की ओपीडी पर गौर करें तो यहां रोजाना करीब 1200 से 1500 के करीब मरीज आते हैं। अप्रैल में ही पड़ रही भीषण गर्मी के कारण इलाज कराने आने वाले लोगों को पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
अस्पताल प्रशासन का दावा है कि यहां पर सात वॉटर फिल्टर लगाए गए हैं। यहां चिलर के जरिए लोगों को ठंडा पानी उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन यह दावा सिर्फ कागजी है। सोमवार को इस बाबत अमर उजाला ने जिला अस्पताल की पड़ताल की। अस्पताल में इमरजेंसी के करीब लगा फ्रीजर बंद मिला। यहां पानी तो टोटी से निकल रहा था लेकिन गर्मी के कारण वह खौल रहा था। ब्लड बैंक के पास बने वॉटर प्लांट का भी यही हाल था। यह प्लांट बंद मिला।
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मरीज व तीमारदार पानी की बोतल लेकर भटक रहे थे। टेवां गांव के मनोज कुमार ने बताया कि वह यहां डायलिसिस के लिए आते हैं। अस्पताल में पानी की व्यवस्था नहीं होने के कारण घर से या फिर बाहर से बोतल बंद पानी खरीदना पड़ता है। इसी तरह कोड़र के उमेश मिश्रा का कहना है कि गर्मी के कारण प्यास ज्यादा लगती है। अस्पताल में कहने को तो फ्रीजर लगे हैं लेकिन उसने से गर्म पानी आता है। इस वजह से मजबूरी में 20 रुपये बोतल का पानी खरीद कर पीना पड़ रहा है।
अस्पताल परिसर में मरीज व तीमारदारों को शुद्ध व ठंडा पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सात फ्रीजर लगाए गए हैं। कितने फ्रीजर खराब है, इसकी जानकारी नहीं है। मरीज व तीमारदारों को अगर पेयजल की समस्या है तो मामले की जांच कराकर समस्या का समाधान कराया जाएगा। डॉ. दीपक सेठ, सीएमएस जिला अस्पताल
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