दहेज हत्या में दोषी पति को 14 वर्ष का सश्रम कारावास
- घटना के दोषी देवर व सास को भी हुई सात-सात वर्ष की सजा
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। अपर जिला जज फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय पूर्णिमा प्रांजल ने बुधवार को दहेज हत्या के एक मामले की सुनवाई की। अदालत ने दोषी पति को 14 व देवर और सास को सात-सात वर्ष की सजा सुनाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने तीनों के खिलाफ 16-16 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
वादी अभियोजन के अनुसार करारी कोतवाली के गुवारा निवासी कुंजवती ने अपनी पुत्री उर्मिला का विवाह वर्ष 2015 में चरवा कोतवाली के अरई सुमेरपुर निवासी वीरेंद्र विश्वकर्मा के साथ किया था। शादी के बाद से उर्मिला के पति वीरेंद्र, देवर राजेंद्र और सास उर्मिला देवी अतिरिक्त दहेज में 50 हजार रुपये और भैंस की मांग कर विवाहिता को परेशान करने लगे। उत्पीड़न से परेशान होकर उर्मिला ने 22 जून 2017 की दोपहर खुद को आग लगा ली थी। प्रयागराज के स्वरूप रानी अस्पताल में इलाज के दौरान 24 जून 2017 को उसकी मौत हो गई थी। मामले में उर्मिला की मां कुंजवती ने उसके पति, देवर, सास व ननदोई के खिलाफ दहेज हत्या की रिपोर्ट दर्ज करा दी। पुलिस ने उर्मिला के पति, देवर और सास के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया, जबकि ननदोई की घटना में संलिप्तता नहीं मिलने पर उसे क्लीन चिट दे दी। एडीजीसी अनिल कुमार चौधरी व विशेष लोक अभियोजन ने छह लोगों की गवाही कराई। दोनों ओर से की गई बहस व पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्य को देखने के बाद कोर्ट ने दहेज हत्या के दोषी पति वीरेंद्र को 14 वर्ष के कठोर कारावास व देवर राजेंद्र व सास उर्मिला को सात-सात साल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने दोषियों के खिलाफ 16-16 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।