सीएचसी सरायअकिल में अधीक्षक सहित छह पुरुष डॉक्टर व तीन महिला डॉक्टर तैनात हैं। अमूमन तो रोज यह आते नहीं। डेंगू के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए सार्वजनिक अवकाश को रद्द करते हुए प्रमुख सचिव ने नवरात्र व दशहरा पर सभी ओपीडी चालू करने का फरमान जारी किया था। इसके बाद भी अधीक्षक सीएचसी के डॉक्टरों ने प्रमुख सचिव के निर्देश को तवज्जो नहीं दिया। मरीज आते रहे और जाते रहे, लेकिन डॉक्टर नहीं आए।
सरायअकिल सीएचसी के अधीक्षक डॉ. एस के ठुकराल हैं। सार्वजनिक अवकाश की छुट्टियां रद्द होने के बाद भी वह सोमवार को अस्पताल नहीं पहुंचे। डॉ. एस के ठुकराल प्रभारी हैं। इनकी गैर हाजिरी से तमाम काम अस्पताल के स्वत: ठप हो जाते हैं। इसके बाद भी इन्होंने आना जरूरी नहीं समझा। ये अकेले नहीं थे। डॉ. केएन गुप्ता सर्जन, डॉ. टीबी मौर्य, डॉ. राजेश कुमार 11:45 बजे दोपहर तक गायब थे।
डॉ. राजेश कुमार 11:50 बजे दोपहर पहुंचे वह भी अपनी औपचारिकता पूरी करने। इनके अलावा डा. अलमका, डॉ. कामना वर्मा और डॉ. यास्मीन का कुछ अता-पता नहीं चल रहा था। ओपीडी बंद थी। हमेशा की तरह सोमवार को भी इस अस्पताल में डॉ. आबिद शाहिद और डॉ. ज्ञानचंद्र निर्धारित समय पर पहुंचे। यही मरीजों को देख रहे थे और दवाएं दे रहे थे। सार्वजनिक अवकाश रद्द होने पर डॉक्टर क्याें नहीं आए, इस सवाल का जवाब किसी ने नहीं दिया। यह जरूर बताया कि इस संबंध में आप अफसरों से बात करिए।
रात में इमरजेंसी स्टॉफ भी रहता है गायब
सरायअकिल सीएचसी का इमरजेंसी स्टॉफ भी रात में गायब रहता है। देर रात घटनाएं होने पर यहां मौजूद लोग सीधे मरीज को जिला अस्पताल रेफर करते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह कि न तो डॉक्टर रहता है, न ही कर्मचारी। तीन दिन पहले सरायअकिल के दिनेश त्रिपाठी एक घायल को लेकर पहुंचे थे, लेकिन उनको कोई नहीं मिला। इसकी शिकायत उन्होंने सीएमओ से की थी। इसके बाद भी अस्पताल से कोई मदद नहीं मिली।