मंझनपुर (सदर) तहसील क्षेत्र में स्थित 55 बीघे शत्रु संपत्ति की जांच-पड़ताल में गृह मंत्रालय की टीम पिछले 15 दिनों से जुटी है। टीम ने मौके का सर्वे पूरा कर लिया है। रिपोर्ट में 10 बीघा जमीन ऐसी मिली है जिसपर लोगों ने कब्जा कर घर व दुकानों के साथ ही व्यावसायिक प्रतिष्ठान का निर्माण कर लिया है।
मंझनपुर तहसील क्षेत्र में शत्रु संपत्ति की 55 बीघा जमीन विभिन्न गांवों में दर्ज है। इनमें पाता की गाटा संख्या 117, मंझनपुर की गाटा संख्या 26, मोइयनपुर में गाटा संख्या चार और भेलखा में गाटा संख्या 48 शामिल हैं। गृह मंत्रालय के शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय नई दिल्ली के कैप्टन विद्यासागर कुशवाहा ने डीएम को पत्र भेजकर राजस्व टीम गठित कर रिपोर्ट मांगी थी। इस पर डीएम मधुसूदन हुल्गी ने मंझनपुर तहसीलदार सिद्धांत कुमार को कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
निर्देशों के बाद नायब तहसीलदार कपिल मिश्रा की अध्यक्षता में एक टीम गठित की गई। इनमें एक कानूनगो और पांच लेखपाल शामिल किए गए। स्थानीय स्तर पर टीम गठित होने की जानकारी के बाद गृह मंत्रालय की ओर से सर्वेक्षक सतेंद्र कुमार सिंह और सोवेंद्र सिंह भी आ गए।
इन्होंने टीम के साथ मिलकर सभी शत्रु संपत्तियों का स्थलीय निरीक्षण और सीमांकन किया। जांच में यह तथ्य सामने आया कि 55 बीघा में से करीब 45 बीघा जमीन खाली पड़ी है। जबकि 10 बीघा जमीन पर स्थानीय लोगों ने कब्जा कर दुकानों और मकानों का निर्माण कर रखा है।
सर्वेक्षक टीम ने कब्जे वाले हिस्सों का विवरण दर्ज कर लिया है। शीघ्र ही सर्वे रिपोर्ट गृह मंत्रालय को भेजी जाएगी। जांच में यह भी पाया गया कि मंझनपुर-करारी मार्ग के किनारे स्थित कुछ हिस्सों में शत्रु संपत्ति से अवैध रूप से बालू का कारोबार भी हो रहा है।
गृह मंत्रालय की टीम ने स्थानीय टीम के साथ सर्वे कर रिपोर्ट तैयार कर ली है। सीमांकन समेत अन्य कार्य पूरे हो गए हैं। जल्द ही रिपोर्ट गृह मंत्रालय को भेजी जाएगी। इसके बाद वहां से मिले निर्देश पर आगे की कार्रवाई होगी। - एसपी वर्मा, एसडीएम
क्या है शत्रु संपत्ति
शत्रु संपत्ति से तात्पर्य उन सभी चल और अचल संपत्तियों से है, जो ऐसे व्यक्तियों या संस्थाओं की है जो भारत के साथ शत्रुतापूर्ण युद्ध में रहे देश के नागरिक हैं या शत्रु राष्ट्र घोषित किए गए देश के नागरिक हैं। ये वे संपत्तियां हैं जो 1962 के भारत-चीन युद्ध और 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद उन लोगों की ओर से भारत में छोड़ी गई थीं, जिन्होंने पाकिस्तान या चीन की नागरिकता ले ली थी।