सिराथू तहसील के बम्हरौली के हरने वाले शिवा और संजीत कुमार 17 अप्रैल को अपने कुछ अन्य दोस्तों के साथ पशुओं को चराने जंगल की तरफ गए थे। वहां पर इन बच्चों ने देखा कि एक बाज एक गौरैया को पकड़े हुए है।
सिराथू तहसील के बम्हरौली के हरने वाले शिवा और संजीत कुमार 17 अप्रैल को अपने कुछ अन्य दोस्तों के साथ पशुओं को चराने जंगल की तरफ गए थे। वहां पर इन बच्चों ने देखा कि एक बाज एक गौरैया को पकड़े हुए है। यह देख बच्चों से रहा नहीं गया और उन्होंने किसी तरह बाज के पंजों से चिड़िया को छुड़ा लिया। हालांकि, इसके बाद भी वह गौरैया को बचा नहीं सके। बाज के पंजों में ही उसने दम तोड़ दिया था।
विज्ञापन
चिड़िया की मौत से गमजदा बच्चों ने उसका अंतिम संस्कार किया। इसके बाद घर आकर परिजनों को पूरी बात बताई। साथ ही विधि विधान से चिड़िया की तेरहवीं संस्कार करने की बात कही। बच्चों की इच्छा का अभिभावकों ने भी मान रखा। शिवा और संजीत के अलावा श्यामू, अजय, जितेंद्र, अंजली, पूनम समेत अन्य बच्चों ने चंदा जुटाया।
इससे रविवार को चिड़िया की तेरहवीं में भोज का इंतजाम हुआ, जिसमें गांव के तमाम लोगों ने हिस्सा लिया। करीब 100 से अधिक लोगों के इस तेरहवी में भोजन करने की बात कही जा रही है।