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कौशांबी : महिलाकर्मी ने बयां किया दर्द, बोली- मेरी खामोशी का डीपीओ गलत फायदा उठाते रहे, सालभर से थी बुरी नजर

Wed, 28 Dec 2022 10:35 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी

सार

प्रोबेशन अधिकारी रामनाथ राम की गलत हरकतों से आजिज महिलाकर्मी का सब्र का बांध आखिरकार टूट गया। साल भर से अधिकारी की अश्लील हरकतों का सामना कर रही कर्मचारी ने पुलिस को दी तहरीर में अपना दर्द बयां किया।
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कौशांबी : डीपीओ राजनाथ राम। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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प्रोबेशन अधिकारी रामनाथ राम की गलत हरकतों से आजिज महिलाकर्मी का सब्र का बांध आखिरकार टूट गया। साल भर से अधिकारी की अश्लील हरकतों का सामना कर रही कर्मचारी ने पुलिस को दी तहरीर में अपना दर्द बयां किया। कर्मचारी का दावा है विभाग में ज्यादातर लोग संविदा में नौकरी करते हैं। कॅरियर खराब नहीं हो, इस वजह से कोई अफसर की हरकत का विरोध नहीं करता था। वह भी विरोध नहीं करती थी। खामोशी का डीपीओ गलत फायदा उठाते रहे। 

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सदर कोतवाली पुलिस को दिए तहरीर में महिलाकर्मी ने बताया कि साल भर से आरोपी डीपीओ उसे परेशान करता था। जब विभागीय काम से वह अधिकारी के दफ्तर जाती थी तो वह उसके साथ अश्लील हरकत करता था। बैड टच का प्रयास भी करता था। इसके अलावा एमएमएस भेजने के साथ ही व्हाट्सएप व वीडियो कॉलिंग करके संबंध का दबाव बनाया जाता था। 24 दिसंबर को उसने दफ्तर में एक अन्य महिला कर्मचारी के साथ भी छेड़खानी की।

महिला के शोर मचाने पर आरोपी भाग निकला। मामले की शिकायत होने पर यूपी-112 पुलिस भी पहुंची, लेकिन दबंग अफसर के खौफ व खुद का भविष्य खराब होने के डर से किसी की मुंह खोलने की हिम्मत नहीं हुई। इसके बाद उसके साथ भी छेड़खानी हुई। मुकदमा दर्ज कराने वाली महिलाकर्मी प्रयागराज की रहने वाली है। उसका कहना है आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने व भविष्य खराब होने के डर से वह खामोश रही, लेकिन उसकी खामोशी का डीपीओ गलत फायदा उठाते रहे।
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विकास भवन में पसरा सन्नाटा, सिर्फ अश्लील हरकत की चर्चा
विकास भवन में ही जिला प्रोबेशन अधिकारी का कार्यालय है। बुधवार सुबह जब कर्मचारी दफ्तर पहुंचे तो समाचार पत्रों के जरिये उन्हें मामले की जानकारी हुई। डीपीओ के खिलाफ छेड़खानी व अश्लील हरकत का आरोप लगाने वाली कर्मचारी भी नहीं आई थी। डीपीओ भी दफ्तर नहीं पहुंचे। विकास भवन के अन्य पटल के कर्मचारी डीपीओ कार्यालय में तांक-झांक करने पहुंचते थे। सिर्फ यही चर्चा होती रही कि एक ही परिसर में बने दफ्तर में यह सब भी होता रहा और किसी को कानोकान भनक तक नहीं लगी।
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