मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में मरीज के कान की जांच करते डॉ. ज्ञानेंद्रधर द्विवेदी। संवाद
ईयरफोन और हेडफोन का लंबे समय तक उपयोग लोगों के लिए परेशानी का कारण बनता जा रहा है। मेडिकल कॉलेज की नाक-कान-गला (ईएनटी) ओपीडी में इन दिनों कान संबंधी समस्याओं के मरीजों की संख्या बढ़ी है। यहां रोजाना 100 से अधिक मरीज आते हैं, जिनमें 15 से 20 मरीजों को कान में दर्द, सूजन और ऊंचा सुनने की परेशानी है।
नाक-कान-गला रोग विशेषज्ञ डॉ. ज्ञानेंद्रधर द्विवेदी ने बताया कि कान के अंदर एक पतला पर्दा होता है, जिसे ईयर ड्रम कहा जाता है। इसमें कई बारीक नसें होती हैं, जो सीधे दिमाग से जुड़ी होती हैं। जब लोग ईयर फोन या हेडफोन लगाकर तेज आवाज में संगीत सुनते हैं तो ध्वनि का कंपन दबाव के साथ ईयर ड्रम से टकराता है और उसे क्षति पहुंचा सकता है। समय पर उपचार न होने पर यह समस्या स्थायी भी बन सकती है।
कई लोग अपने ईयर फोन एक-दूसरे के साथ बदलकर इस्तेमाल करते हैं, जिससे कान में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ईयर फोन को नियमित रूप से सैनिटाइजर से साफ करके ही उपयोग करना चाहिए।
इलाज कराने आए शुभम श्रीवास्तव ने बताया कि पहले घंटों ईयर फोन लगाकर गाने सुनते थे, लेकिन अब कान में दर्द और भारीपन महसूस होता है। वहीं, वैष्णवी ने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान लंबे समय तक ईयर फोन लगाने से सिरदर्द की समस्या होने लगी, अब वे बीच-बीच में ब्रेक लेती हैं।