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डेढ़ साल बाद भी 22 गांव नगर पालिका भरवारी के नहीं हो सके

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Even after one and a half years, 22 villages could not belong to Municipality Bharwari - फोटो : KAUSHAMBI
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डेढ़ साल बाद भी 22 गांव नगर पालिका भरवारी के नहीं हो सके
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पेंशन, शादी-बीमारी एवं पारिवारिक लाभ के लिए भटक रहे ग्रामीण
समाहित कर नए वार्ड बना दिए गए थे सिराथू के चौदह व मूरगंज ब्लॉक के आठ गांव
समाज कल्याण विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर वार्डों के नाम नहीं दर्ज होने से बढ़ी परेानी
मंझनपुर। नगर पालिका भरवारी में समाहित सिराथू एवं मूरतगंज ब्लॉक के 22 गांवों को समाज कल्याण विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर वार्ड के रूप में करीब डेढ़ साल बाद भी नहीं दर्ज किया जा सका है। इससे विभाग की ओर से संचालित पेंशन, शादी-बीमारी एवं पारिवारिक लाभ आदि योजनाओं के लिए इन गांव के पात्रों को चक्कर लगाना पड़ रहा है। इस बाबत किए गए दर्जनों रिमाइंडर का भी कोई असर पड़ रहा है।
तकरीबन डेढ़ साल पहले जिले की भरवारी टाउन एरिया को नगर पालिका घोषित किया गया था। उस वक्त शासन के निर्देश पर सिराथू ब्लॉक के 14 व मूरतगंज के आठ गांव नवगठित नगर पालिका में समाहित कर दिए गए थे। इन गांवों का नाम भी बदल दिया गया। तब से इन गांवों की सुविधाओं, संसाधनों एवं योजनाओं पर नगर पालिका प्रशासन का नियंत्रण हो गया है। लेकिन कुछ सरकारी विभागों के अभिलेखों में अभी भी समाहित किए गए गांवों को वार्ड के रूप में नया नाम नहीं दर्ज किया गया। इन्हीं में से एक है समाज कल्याण विभाग। इस विभाग से वृद्धा, विधवा तथा दिव्यांग पेंशन के साथ ही शादी-बीमारी अनुदान एवं परिवारिक लाभ योजनाओं का संचालन होता है, लेकिन विभाग के ऑनलाइन पोर्टल में वार्डों का नाम नहीं दर्ज होने से पात्रों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल योजनाओं से लाभान्वित होने के लिए ग्रामीण क्षेत्र के पात्रों को ऑनलाइन आवेदन की हार्ड कॉपी संबंधित ब्लॉक तथा नगरीय क्षेत्र के बाशिदों को नगर निकाय कार्यालय में जमा करने का प्रावधान है।
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इसके बाद ग्रामीण क्षेत्र का होने पर सेक्रेटरी तथा नगरीय का नगर प्रशासन के कर्मचारी आवेदनों की पड़ताल कर जांच रिपोर्ट लगाते हैं। तब जाकर आवेदन को स्वीकृति के लिए फारवर्ड किया जाता है। लेकिन नगर पालिका भरवारी में समाहित गांवों का नाम विभागीय पोर्टल में नहीं दर्ज होने के कारण पात्रों को इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। जिला समाज कल्याण अधिकारी सुधीर कुमार का कहना है कि पोर्टल के मास्टर डाटा बेस में परिवर्तन के लिए निदेशालय को पहली बार 16 जनवरी 2019 को पत्राचार किया गया था। तब से अब तक कई बार रिमाइंडर भेजा जा चुका है।
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इनका कहना है
समस्या को देखते हुए डीएम मनीष कुमार वर्मा ने अपने स्तर से एक रास्ता निकाला है। इसके तहत ऑनलाइन आवेदन के बाद नगर पालिका में जमा हार्ड कॉपी का ब्लॉकों के माध्यम से सत्यापन कराकर रिपोर्ट लगा दी जा रही है। हालांकि इसमें थोड़ी परेशानी जरूर हो रही है। पर किसी तरह से काम चलाया जा रहा है।-सुधीर कुमार, जिला समाज कल्याण अधिकारी
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