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ई-टेंडरिंग : बालू खनन की शर्तों ने उड़ाई नींद

Wed, 26 Apr 2017 01:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
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 बालू खनन की अनुमति मिल चुकी है। छह महीने के लिए बालू घाट चलेंगे। ई-टेंडर के जरिए घाटों का आवंटन किया जाएगा। ई-टेंडर की प्रक्रिया से लोग रूबरू हुए तो वह दंग रह गए। छह माह की अवधि के बीच बारिश का सीजन भी है। इस सीजन का लाभ नहीं मिलेगा। इसके अलावा ई-टेंडर होते ही बालू खनन की अनुमति जितने घन मीटर की मिलेगी, उसकी रायल्टी पहले देनी पड़ेगी। जटिल प्रक्रिया को देख कारोबारियों के होश उड़ गए हैं। कई कारोबारियों ने इसे घाटे का सौदा बताते हुए अपना हाथ ही खींच लिया है।
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  यमुना की तराई में बड़े पैमाने पर बालू का खनन होता है। हाईकोर्ट के आदेश पर जिले में बालू का खनन बंद हो गया था। सीबीआई जांच ने भी बालू कारोबारियों पर शिकंजा कस रखा था। बालू की कमी से सरकारी कार्य के अलावा निजी कार्य भी प्रभावित हो रहे थे। इसको देखते हुए सरकार ने छह माह के लिए बालू खनन की अनुमति हासिल कर ली है। अनुमति मिलते ही सरकार ने ई-टेंडर के जरिए ठेका देने की कवायद शुरू कर दी है। इसकी जानकारी होते ही बालू कारोबारियों ने खनन विभाग का चक्कर काटना शुरू कर दिया। अपर मुख्य सचिव राज प्रताप सिंह ने ई-टेंडर कैसे होगा और कौन लोग इसके पात्र होंगे, इसकी गाइड लाइन भेजी जिलाधिकारियों को भेजी है।

इस गाइड लाइन की कारोबारियों को जानकारी हुई तो उनके चेहरे का रंग उड़ गया। छह माह का ठेका दिया जाएगा। एक जुलाई से नौ सितंबर तक बारिश का मौसम रहता है। इस दौरान खनन नहीं होता है। बारिश की इस अवधि का लाभ ठेकेदारों को नहीं मिलेगा। इसके अलावा जितने घन मीटर की खुदाई का ठेका मिलेगा, उसकी रायल्टी ठेकेदार को पहले जमा करनी होगी। ठेका होने के बाद 15 दिन प्लानिंग चार्ट बनाने में लग जाएगा। इसके बाद तमाम अन्य समस्याओं से ठेकेदारों को जूझना पड़ेगा। जटिल प्रक्रिया को देखने के बाद ठेकेदारों ने इससे मुंह मोड़ना शुरू कर दिया है। इस ठेके में युवाओं ने जरूर दिलचस्पी दिखाई है और वह विभाग के बाबू से एक-एक जानकारी हासिल कर रहे हैं। वहीं जानकारों का कहना है कि यह टेंडर घाटे का सौदा है।
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