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शीतला अष्टमी पर कड़ा धाम में उमड़ा भक्तों का हुजूम

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शीतला अष्टमी पर शुक्रवार को शीतला धाम कड़ा में श्रद्धालुओं का जन सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह से ही भक्तों का हुजूम गाते बजाते गंगा नदी के कुबरी घाट तक पहुंचा। गंगा में आस्था की डुबकी लगाने के बाद भक्तों का हुजूम दर्शन के लिए मां शीतला के दरबार पहुंचा। दर्शन-पूजन के बाद श्रद्धालुओं ने मन्नतें मांगी और मां का जयकारा लगाते हुए मेले में खरीदारी की।
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जौनपुर, रायबरेली और फतेहपुर सहित विभिन्न जनपदों से भक्त भारी भरकम पालना लेकर माता को चढ़ाने के लिए शीतलाधाम पहुंचे। पालने की सुंदर सजावट लोगों को आकर्षित कर रही थी।
दूसरी ओर सैकड़ों की झुंड में झंडा निशान चढ़ाने के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालु मां का जयकारा लगा रहे थे। बैंड बाजा और ढोल नगाड़ों की धुन पर नाचते-गाते श्रद्धालु मां की भक्ति में पूरी तरह से लीन नजर आए। मां शीतला के दर्शन करने आए लोगों का कहना है कि आषाढ़ मास की सप्तमी और अष्टमी को मां के दरबार में हाजिरी लगाने से माता प्रसन्न होकर भक्तों के समस्त कष्टों का नाश करती है। साथ ही उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।
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कोरोना महामारी पर आस्था रही भारी
शीतलाधाम में आषाढ़ की अष्टमी पर कोरोना महामारी पर आस्था भारी पड़ गई। ऐसा ही कुछ नजारा शुक्रवार को शीतलाधाम कड़ा के अष्टमी मेले में देखने को मिला। हजारों की संख्या में सुबह से ही श्रद्धालुओं का हुजूम मां शीतला के दरबार में पूजा अर्चना के लिए पहुंचने लगा था। दोपहर करीब 12 बजे तक पूरे कड़ा धाम परिसर में भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा।
स्टैंड के नाम पर वसूली गई मनमानी रकम
मेला परिसर में वाहनों के प्रवेश पर पाबंदी लगाई गई थी। इसके लिए पुलिस प्रशासन ने मुख्य मार्ग पर बैरिकेडिंग लगा रखी थी। इसका फायदा उठाते हुए स्थानीय लोगों ने बगैर किसी प्रशासनिक अनुमति के वाहन स्टैंड बना दिया।
दूर-दराज से मां के दरबार में माथा टेकने आए लोगों से स्टैंड संचालकों ने मनमानी रकम वसूली। इसे लेकर स्टैंड संचालकों एवं भक्तों के बीच दिनभर कहासुनी होती रही। दर्शनार्थियों का आरोप है कि मेला ड्यूटी पर रहे पुलिसकर्मी भी वाहन स्टैंड के नाम पर मनमानी करने वालों को नहीं रोका। इसे लेकर भक्तों में नाराजगी रही।
एक तो अंधेरा, ऊपर से जंगल
शीतलाधाम के मेला क्षेत्र में दूर-दराज से भक्तों के लिए 23 धर्मशालाएं हैं, लेकिन भीषण गर्मी के चलते बृहस्पतिवार की शाम से ही पहुंचे भक्तों को जंगल में रात गुजारनी पड़ी। गनीमत यह रही कि जंगल के अंधेरे में किसी भक्त के साथ कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।
मेला में हर तरफ नजर आई अव्यवस्था
करीब चार किलोमीटर की परिधि में फैले मेला क्षेत्र व्यवस्था के नाम पर सब कुछ देवी मां के सहारे ही रहा। प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह से फेल नजर आई। पानी के लिए न कोई अतिरिक्त वाटर टैंकर मंगाए गए और न ही कोई चिकित्सीय व्यवस्था की सुविधा उपलब्ध थी।
कहीं नालियां चोक रहीं तो जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे थे। बतादें कि पहले सफाई के लिए डीपीआरओ के निर्देश पर कर्मचारियों को लगाकर मेले से पूर्व सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करा ली जाती थी। यही नहीं किसी भी प्रकार मेला आए श्रद्धालुओं को असुविधा न हो, इसके लिए भी सभी विभाग के जिम्मेदार सुविधा मुहैया कराने का काम करते थे।
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