बाजार घाट में डूबे सेवानिवृत्त फौजी का शव सातवें दिन रविवार को मछुआरे के जाल में फंसकर बाहर आ गया। वहीं बेटे का अभी कोई सुराग नहीं लग सका। पोस्टमार्टम के बाद गमगीन माहौल पर परिजनों ने हनुमान घाट पर शव का अंतिम संस्कार कर दिया। छोटी बेटी ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी।
कड़ाधाम के दारानगर कस्बे के रामनगर मोहल्ला निवासी 80 वर्षीय मनमोहन मिश्रा के निधन के दसवें दिन सोमवार सुबह परिवार के लोग बाजार घाट पर गंगा किनारे क्षौर कर्म करने गए थे। वहां ऋषभ को बचाने के चक्कर में एक-एक कर चार लोग डूब गए थे। इनमें ऋषभ और उसके पिता जय जनार्दन मिश्रा का पता नहीं चला। जबकि घर के एक सदस्य की मौत हो गई थी।
रविवार सुबह मछुआरों ने मछलियों के शिकार के लिए गंगा में जाल फेंका। घंटे भर बाद जाल में हाथ का एक पंजा दिखने पर उसने सूचना स्थानीय निवासी संत को दी। संत ने खबर चेयरमैन प्रतिनिधि अरुण केसरवानी को दी। सूचना पर थानाध्यक्ष धीरेंद्र सिंह घाट पर पर पहुंचे और स्थानीय लोगोंं की मदद से शव बाहर निकलवाया।
शिनाख्त होने पर जानकारी परिजनों को दी तो जय जनार्दन मिश्र की पत्नी आद्या मिश्रा, बेटी विभा, अंशिका और मानसी रोते-बिलखते हुए घाट पर पहुंचीं और शव की पहचान की।
हनुमान घाट पर फोर एफएसआर अंडर बटालियन के सूबेदार बीके राय जवानों के साथ पहुंचकर सेवानिवृत्त फौजी को पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। सबसे छोटी बेटी मानसी ने गमगीन माहौल में पिता को मुखाग्नि दी।
घाट पर एमएलसी मानसिंह यादव, सीओ सिराथू अवधेश विश्वकर्मा के साथ ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे। अब लापता ऋषभ की तलाश तेज कर दी गई है।
मृतक जय जनार्दन की फाइल फोटो।